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.. तो देश में नहीं आएगा मानसून

रिव प्रकाश ितवारी चंडीगढ़जलवायु पिरवर्तन का आलम यही रहा तो देश में मानसून नहीं आएगा। इसकी मुख्य वजह पानी के तापमान में वृिद्ध होगी। यह दावा है देश के जाने-माने वैज्ञािनक प्रो. पीसी केसावन ने। वर्तमान में एमएस स्वामीनाथन फाउंडेशन से जुड़े केसवानी ने कहा कि अलास्का से ऑस्ट्रेिलया तक जलवायु पिरवर्तन का असर देखा जा रहा है। देश पर असर देखें तो यह दिक्षण-पिश्चम मानसून को प्रभािवत कर रहा है। आलम यही रहा तो हमें मानसून से हाथ धोना पड़ जाएगा। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि चेरापूंजी में अब तक सबसे अिधक बािरश िरकॉर्ड की जा रही थी, जो िपछले वर्षो में घटी है जबकि रेिगस्तान के कई इलाकों में जमकर बािरश हुई है। यह ग्लोबल वार्िमग की ही देन है। उन्होंने कहा कि लगभग 250 वर्षो में साइबेिरया के तापमान में 3 िडग्री का इजाफा, समुद्र तल में 2 से 3 मीटर का उछाल आिद दर्शाता है कि जलवायु पिरवर्तन असर छोड़ रहा है।कम हो जाएगी हिरयाणा-पंजाब की पैदावारप्रो. केसावन ने कहा कि हमारे देश के प्रमुख खाद्यान्न उत्पादन राज्य पंजाब और हिरयाणा पर ग्लोबल वार्िमग का काफी असर पड़ेगा। इस क्षेत्र में अगर तापमान में .5 िडग्री की वृिद्ध होती है तो यह प्रित हेक्टेयर 450 किलो गेहूं की पैदावार घटेगी जबकि एक िडग्री सेिल्सयश का उछाल 750 किलो प्रित हेक्टेयर की पैदावार कम कर देगा।उत्पादन को 30 फीसदी बढ़ाने का शोध जारीपैडी का डैडी नाम से िवख्यात आईआर-36 और आईआर- 64 चावल की किस्मे देने वाले प्रो. जीएस खुश ने कहा कि गेट्स फाउंडेशन के िनर्देशन में नई तकनीकी पर काम चल रहा है। यह एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है और इसे पूरा करने में इंटरनेशनल राइस इंस्टीटय़ूट जुटा है। नई तकनीकी के आने के बाद पैदावार को 30 फीसदी बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि 2050 तक पैदावार दोगुना करना जरूरी है, क्योंकि इसी के अनुपात में मांग बढ़ेगी। चावल का उदाहरण रखते हुए उन्होंने कहा कि िफलहाल हमारे देश में 140 िमिलयन टन चावल की पैदावार है जो 2050 तक 200 िमलीयन टन होनी ही चािहए।बीटी पर बवाल बेवजहप्रो. खुश ने कहा कि बीटी उत्पादों पर बवाल बेवजह है और इसे हवा देने में कीटनाशक कंपिनयां लगी हुई हैं। बीटी फसलों की खाितर कीटनाशकों का इस्तेमाल कम होगा, ऐसे में इनका व्यवसाय प्रभािवत होगा। यही वजह है कि ये दुस्प्रचार करने में जुटी हुई हैं।ं

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