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भागलपुर-किसानों की किस्मत बदलेंगे 145 गुरू, हरियाणा,पंजाब की तर्ज पर

भागलपुर-किसानों की किस्मत बदलेंगे 145 गुरू, हरियाणा,पंजाब की तर्ज पर खेती का प्रशिक्षण देंगे221ल्ल3 31ील्ल्रॠ भ् प्रशिक्षित महिला किसान भी जुटीं स्त्रियों को खेती के गुर सिखाने मेंकार्यालय संवाददाता भागलपुर। देश के नामी गिरामी कृषि अनुसंधान केन्द्रों से प्रशिक्षण लेकर लौटे 145 किसान जिले में खेती की तस्वीर बदलेंगे। ये ट्रेंड किसान हरियाणा, पंजाब की तर्ज पर खेती के गुर जिले के अन्य किसानों को सिखाएंगे। इस योजना की निगरानी एजेंसी आत्मा ने ट्रेंड किसानों में से कुछ मास्टर ट्रेनरों की सूची तैयार की है जो किसान समूह को वैज्ञानिक खेती का तरीका बताएंगे। पहली बार उत्प्रेरक बनकर 15 महिला किसानों ने महिलाओं को खेती से जोड़ने की कवायद शुरू की है। इसके लिए आत्मा ने किसानों का समूह बनाने का काम शुरू कर दिया है। अबतक 40 समूह बनाए जा चुके हैं। हाल के पांच-छह महीने में आत्मा की ओर से पांच चरणों में 145 किसानों को बाहर भेजकर आधुनिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया था। आत्मा के परियोजना निदेशक संजय कुमार के अनुसार इनमें 80 किसानों को देश के नामी कृषि संस्थानों में वहां के वैज्ञानिकों ने खाद, बीज, सिंचाई और मशीनों के आधुनिक और बेहतर उपयोग और बोआई से फसल कटाई तक के वैज्ञानिक तरीक बताए। शेष किसानों को राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेलों में भेजकर नई जानकारियों से लैस कराया गया है। पहली बार 15 महिला किसानों को भी कृषि संस्थान, बीएचयू भेज कर सब्जी की खेती और खाद्य प्रसंस्करण की ट्रेनिंग दी गई है। किसानों को दिल्ली और बनारस के आसपास के खेतों में भेजकर वहां की खेती के तौर-तरीकों को दिखाया गया है। श्री कुमार के अनुसार ट्रेंड महिला किसानों को महिलाओं के बीच भेजकर खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। बनारस से ट्रेनिंग लेकर लौटीं कं चन देवी बताती हैं कि महिलाएं घर के आसपास पोदिना, धनिया, मेथी और लहसूनआदि की खेती कर बढिम्या कमाई कर सकती है। आत्मा के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त किसान नई जानकारियों को अपनी खेती में प्रयोग कर रहे हैं। पीरपैंती के किसान वैदेहीशरण सिंह ने कहा कि हारमोन्स का प्रयोग करके सब्जी का पैदावार बढ़ाने की ट्रेनिंग का अपनी खेत पर सफल प्रयोग किया। प्रशिक्षण के लिए कहां गए संख्या कितनी दिन हुई ट्रेनिंगभारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान,नई दिल्ली 50 (दो बार में) सात भारतीय चारा और चारागाह अनुसंधान केन्द्र,झांसी 30 सात दिनकृषि अनुसंधान केन्द्र,बीएचयू 25 दस दिनबीरसा कृषि अनुसंधान केन्द्र,रांची 40 दो दिनसाधन- संसाधन भी बढ़ाने होंगेट्रेंड किसान बोले- सूबे में भी वैसी परिस्थितियां पैदा करे सरकार कृषि उत्पादों के लिए हो बाजार की व्यवस्था बिचौलियों के प्रभाव से मुक्त किए जाएं किसान परंपरागत खेती का मोह छोड़ें किसानकार्यालय संवाददाता भागलपुर। दिल्ली कृषि अनुसंधान केन्द्र से आधुनिक खेती का प्रशिक्षण लेकर लोटे गरैया (नवगछिया) के किसान राजेन्द्र मंडल कहते हैं कि उत्तम खाद, बीज, यंत्र और धन की पक्की व्यवस्था होगी तभीकिसानों को ट्रेनिंग का लाभ मिलेगा और वे वैज्ञानिक खेती अपना पाएंगे। हमारे यहां इन चारों का अभाव है। बैंक साथ नहीं देते। श्री मंडल के अनुसार उन्होंने ट्रेनिंग में जल संचय और नई मशीनों के प्रयोग के बारे में सीखा जिसके सहारे दूसरे राज्यों की तरह हमारे यहां के किसान भी टेंशनमुक्त होकर खेती कर सकते हैं। लेकिन यह तब संभव है जब सरकार यहां इसकी परिस्थितियां पैदा करे। पीरपैंती के किसान वैदेहीशरण सिंह कहते हैं कि बीएचयू से सब्जी की आधुनिक खेती का प्रशिक्षण लेकर जबसे लौटे हैं, हर रोज दस- बीस किसानों को बच्चों की तरह रटा रहे हैं- खेती का तरीका बदलिए। लेकिन यहां के किसान लकीर का फकीर बने हुए हैं। बीएचयू में बताया गया था कि हारमोन्स का छिड़काव करके नरपुष्प को मादा पुष्प में बदला जा सकता है। इससे पैदावार काफी बढ़ जाएगा। रंगरा के किसान वेदव्यास चौधरी के अनुसार दिल्ली में मिली ट्रेनिंग के आधार पर वह बहुफसलीय खेती, संतुलित बीज, खाद का प्रयोग कर पैदावार करने की विधि को यहां के किसानों को बताएंगे और उन्हें परंपरागत खेती से मोह छोड़ने को प्रेरित करेंगे। दिल्ली से ही प्रशिक्षण लेकर लौटे रंगराचौक के उमेश मंडल का कहना है कि हरियाणा और पंजाब की तरह उन्नत खेती के लिए जरूरी है कि कृषि उत्पादों के लिए बाजार की व्यवस्था और किसानों को बिचौलियामुक्त किया जाए। हमारे यहां का किसान अनाज बोने से लेकर ऊपज को बेचने तक बिचौलियों के चंगुल में रहता है। इससे मुक्त होने पर ही किसान हमारी बातों को ग्रहण कर पाएंगे। शाहकुंड के किसान मृगेन्द्र सिंह केंचुआ खाद का अधिकतम उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करेंगे। जगदीशपुर के किसान शंभु सिंह और बबीता देवी अपने प्रखंड के किसानों को कतरनी चावल की खेती में जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ावा देंगी। कंचन देवी ने बीएचयू की ट्रेनिंग में पाया कि खेतों में पैदावार कम होने का एक बड़ा कारण खर पतवार की बहुलता है। वे खेतों को खर पतवारमुक्त करने की जानकारी देंगी। ये सभी किसान आत्मा के मास्टर ट्रनरों की सूची में हैं जो दूसरे किसानों को आधुनिक खेती का गुर सिखाएंगे।

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