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एनएससी-केवीपी प्रकरण:वैगन में थे लोडिंग गाइडेंस से बाहर के भी

वरीय संवाददातापटना। वर्ष 1998 में चोरी गए करोड़ाें के एनएसएसी और केवीपी चोरी के मामले में एक महत्वपूर्ण सच्चाई अबतक सामने नहीं आई है। नासिक से वाया पटना होते हावड़ा जाने वाले उस वैगन से कितने रुपये मूल्य के एनएससी, केवीपी और अन्य पोस्टल सामग्री की चोरी हुई इसका अंदाजा आजतक कोई एजेंसी नहीं लगा सकी। हालांकि 24 फरवरी 1998 को आरपीएफ पटना पोस्ट के तत्कालीन इंस्पेक्टर लक्ष्मण दीक्षित द्वारा जीआरपी में दर्ज कराए गई प्राथमिकी में 40 करोड़ के एनएससी और 40 करोड़ के केवीपी सहित अस्सी करोड़ रुपये मूल्य की पोस्टल सामग्री की चोरी की बात कही गई है पर तब रेल पुलिस ने जो छानबीन की उसमें और कई सनसनीखेज रहस्योद्घाटन हुए। आरपीएफ के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने प्राथमिकी में दर्ज चोरी का अनुमान उस वैगन के लोडिंग गाइडेंस में अंकित विवरणी के अनुसार लगाया था। परंतु उस प्राथमिकी में यह भी अंकित है कि उसी वैगन में लोडिंग गाइडेंस की विवरणी के बाहर का एक पैकेट पाया गया जो पूणे से गौहाटी के लिए बुक था। इससे यह आशंका है कि उस वैगन में लोडिंग गाइडेंस से बाहर के भी पैकेट रहे होंगे तथा उनकी भी चोरी हुई होगी। इससे जाहिर है कि कुल चोरी गई सामग्रियों की कीमत 80 करोड़ रुपये कहीं ज्यादा होगी जिसका खुलासा आजतक नहीं हो सका। बताया जाता है कि जिस वक्त यार्ड में खड़ी वैगन से चोरी की घटना हुई उस वक्त तत्कालीन आरपीएफ इंस्पेक्टर लक्ष्मण दीक्षित छुट्टी पर थे। उनकी जगह एस के सिंह नामक सब-इंस्पेक्टर चार्ज में थे। जब दीक्षित वापस छुट्टी से लौटै उसके बाद यह मामला उजागर हुआ। सूत्रों की मानें तो इस मामले में तब जीआरपी में मामला भी दर्ज नहीं होता पर करोड़ाें रुपये मुल्य के एनएससी-केवीपी मामले में आरपीएफ कर्मी ही दो गुटों में विभक्त हो गए और जब दोनों गुटों में विवाद बढ़ा तब आनन-फानन में इससे संबंधित मामला जीआरपी में दर्ज कराया गया। गौरतलब है कि लक्ष्मण दीक्षित 6 जनवरी से 18 जनवरी 1998 तक निलंबित भी रहे।

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  • Web Title: एनएससी-केवीपी प्रकरण:वैगन में थे लोडिंग गाइडेंस से बाहर के भी