DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिहार दिवस: सौंधी माटी की खुशबू से सुवासित हुई राजधानी अपना

कार्यालय संवाददातापटना। बिहार दिवस। यानी हमारे गर्व का दिवस। महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली व महावीर की जन्मस्थली से पावन यह बिहार। गांधी मैदान के 12 लाख वर्गफीट में अपने सूबे की सारी खूृबसूरती उतर आयी है। हमारे सुनहरे अतीत के साथ लगभग सुनहरा दिख रहा आज भी नजर आता है। हम क्या थे। हमारे पूर्वज कैसे थे। हमारी कला व संस्कृति कितनी समृद्ध थी। राज्य सरकार की ओर से गांधी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय बिहार दिवस का मेगा समारोह सोमवार से शुरू हुआ। आगाज तो शाम में हुआ पर लोगों की भीड़ सुबह से ही उमड़ने लगी। शाम होते तो ऐसा लगा मानो पूरी राजधानी ही यहां चली आयी हो। हर ओर स्त्री-पुरुष व बच्चों का जमावड़ा। कोई सुस्ताता तो कोई गीत-संगीत के मजे लूटता नजर आ रहा था। यहां का हर नजारा अपनी ओर खींच रहा था। किसी एक चीज पर नजर जाती तो हटती ही नहीं थी। मैदान में प्रवेश करते हुए ऐसा लगा कि मानो महात्मा बुद्ध की नगरी बोधगया पहुंच गए हों। बोधगया का महाबोधि मंदिर व उसकी बोधिकाएं। महात्मा बुद्ध की अदभुत मूर्ति। इस मूर्ति के चारों तरफ मंदिर, मस्जिद, चर्च व गुरुद्वारे। सर्वधर्म समभाव के संदेश दे रहे हैं। लोगों के लिए यह नजारा कौतूहल बना था। बोरिं ग रोड से आए रामलखन प्रसाद तो अपने बच्चों के संग इस मूर्ति को न केवल निहार रहे थे बल्कि खुद फोटो भी खीच रहे इस स्मृति को संजोने के लिए। विशेष तरह की लाइटिंग में यह दृश्य और भी नयनाभिराम लग रहा था। वही राकेश व रजनीश कुछ आगे चल रहे तलवारबाजी के करतब देखने में मशगूल रहा। बड़े ही हैरतअंगेज स्टाइल में तलवारबाज अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे थ। उद्घाटन समारोह के कुछ पहले मैदान में बच्चाियों के बीच अपने पारंपरिक खेल कबड्डी का मुकाबला देखने सैकड़ाें लोगों का हुजूम जमा था। कबड्डी के हर दांव लोगों को अपने गांव की याद दिला रहे थे। वहीं पावापुरी का जलमंदिर, बराबर की पहाड़ी, वैशाली व केसरिया का स्तूप अपने सुनहरे अतीत की गवाही दे रहा था। शहीद स्मारक पर तिरंगा लहराते सात शहीद युवाओं में जोश भरने के साथ ही उन्हें अपने बिहारी होने पर गर्व करने को प्रेरित करते रहे। साथ में अपने बिहार की शान गोलघर, सचिवालय, अशोकस्तंभ व यक्षिणी की मूर्ति भी तो हमें अपने आप पर फक्र करने को कहती नजर आयी। बिहारी व्यंजन मेला: मेला में गीत -संगीत का रसास्वादन करने के बाद लोगों की भीड़ बिहारी व्यंजन गैलरी की ओर भागती नजर आयी। यहां आते ही लजीज व्यंजनों की खुशबू से मुंह में पानी न आए तो क्या। लिट्टी -चोखा व चूड़ा-दही से इतर भी हमारे व्यंजनों की वैरायटी है, यहीं आकर पता लगता है। गया का तिलकुट, सिलाव का खाजा, उदवंतनगर का बेलग्रामी, पिपरा का खाजा, धनरुआ और बाढ़ की लाई। न जाने और कितने। लगभग तीन सौ वैरायटी हैं बिहारी व्यंजनों के। दीगर बात है लिट्टी-चोखे के स्टाल पर लोगों की भीड़ तो उमड़ी ही बाकी स्टालों पर भी कम मारामारी नहीं थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बिहार दिवस: सौंधी माटी की खुशबू से सुवासित हुई राजधानी अपना