DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विकसित प्रदेशों के साथ बराबरी कर रहा बिहार देबानन्द कुंवर ने

पटना (हि.ब्यू.)। राज्यपाल के अभिभाषण और विपक्ष के शोरशराबे के साथ विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार को शुरू हुआ। संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल देबानन्द कुंवर ने कहा कि बिहार में फिर से कानून का शासन बहाल हो जाने से भयमुक्त वातावरण बना है। सामाजिक सौहार्द और अमन-चैन कायम है। राज्य सरकार ने विकास की गति को न सिर्फ पटरी पर लाया है बल्कि बिहार को विकसित प्रदेशों की रफ्तार के बराबर पहुंचा दिया है। अभिभाषण में बिहार में आये बदलावों की सराहना के साथ चुनावी वर्ष की आहट भी दिखी। इसमें बिजली क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयासों की झलक तो मिली लेकिन इस फ्रंट पर केन्द्र के लगातार असहयोग का कोई उल्लेख नहीं था। महामहिम ने पिछले चार के कार्यो का पूरा लेखा-जोखा पेश करते हुए राज्य सरकार को जमकर सराहा। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार पंचायतों के सुदृढ़ीकरण के लिए बिहार ग्राम स्वराज योजना सोसायटी का गठन किया जा रहा है। इतना सुनते ही विपक्षी सदस्य अभिभाषण को झूठ का पुलिंदा बताने लगे तो महामहिम उन्हें फटकारते हुए बोले ‘अभी बहुत कुछ है। सुनिए।’ इससे बेअसर राजद के डॉ.रामचन्द्र पूर्वे, माले के अरुण कुमार सिंह और बसपा के रामचन्द्र प्रसाद यादव ने समानांतर भाषण जारी रखा। हद तो तब हुई जब राष्ट्रधुन बजते समय भी डॉ. पूर्वे सावधान की मुद्रा में खड़े होने की बजाय माईक पकड़े रहे। अभिभाषण सोलह पन्नों का था लेकिन महामहिम आठ मिनट में बमुश्किल तीन पन्ने पढ़ पाए। इसकी प्रति पटल पर रखने से पहले उन्होंने कहा कि आम आदमी बीमा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गठित पैक्सों के 1.94 लाख सदस्यों का बीमा कराया जायेगा। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, सड़क, जल संसाधन, बिजली के क्षेत्र में खास प्रयास करने के साथ ही समाज के सभी वर्गो के कल्याण और स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दी है। अल्पसंख्यकों की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को सुदृढ़ करने, महादलितों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के सर्वागिण विकास के लिए सरकार दृढ़संकल्प है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जबरदस्त काम हुआ है। अप्रैल, 09 से जनवरी, 10 तक 9 लाख 45 हजार संस्थागत प्रसव हुए जबकि 2005-06 में यह संख्या सिर्फ 45 हजार थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रति माह मरीजों की संख्या 39 से बढ़कर 4000 हो गयी है। वर्ष 2007 में जबरदस्त बाढ़, 2008 में कोसी संकट जबकि 2009 में भयंकर सूखा पड़ा। इसके बावजूद राज्य सरकार ने जनसहयोग से सामने खड़ी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: विकसित प्रदेशों के साथ बराबरी कर रहा बिहार देबानन्द कुंवर ने