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जस्टिस नोट कांड, गुप्ता से मांगे सबूत

चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की एक महिला जज के घर अगस्त 08 में पैसे पहुंचाने की सीबीआई द्वारा अदालत में दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट पर सीबीआई की अदालत ने हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन से वह तथ्य पेश करने को कहा है, जिसमें सेक्शन-11 और 12 के तहत कार्रवाई बनती है। इसके साथ ही अभियुक्त संजीव बंसल ने मामले में पैरवी करने के लिए उनके बनते हक के संबंध में भी साक्ष्य पेश करने के लिए अदालत से इजाजत मांगी है। गुप्ता द्वारा पैरवी शुरू करने पर बंसल अदालत में जिरह करने लगे थे, लेकिन अदालत ने उनसे कहा कि जब तक अदालत कोई संज्ञान नहीं लेती, उन्हे बोलने का कोई हक नहीं है। इस पर बंसल ने कहा कि यदि समय दे तो वह ऐसे दस्तावेज दे सकते हैं, जिसके आधार पर उन्हें बोलने का हक साबित होता है। उल्लेखनीय है कि अभी अदालत ने इस मामले में हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन द्वारा पैरवी करने के बनते हक पर भी अपना फैसला नहीं सुनाया है। संभावना है कि 20 मार्च को इस बारे भी कोई फैसला हो।शनिवार को मामले में दोनों पक्ष सीबीआई के विशेष जज दर्शन सिंह की अदालत में पेश हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 मार्च मुकर्रर की है और उस दिन दोनों पक्ष अपना पक्ष रखेंगे। शनिवार को हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन के एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि सेक्शन 11 से नीचे के सेक्शन में कार्रवाई चलाने की अनुमति की जरूरत होती है, लेकिन सेक्शन-11 और 12 में अनुमति की जरूरत नहीं होती और सीबीआई को मामला चलाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि एडवोकेट संजीव बंसल और होटलियर रविंदर सिंह भसीन के खिलाफ मामला चलाने को अनुमति की जरूरत ही नहीं थी, लेकिन सीबीआई ने उनके खिलाफ भी मामला नहीं चलाया। अदालत ने गुप्ता से वह तथ्य पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर अदालत सेक्शन-11 और 12 के तहत मामले को चलाने का संज्ञान ले सकती हो।उल्लेखनीय है कि सीबीआई के वकील बी.पी. सिंह अदालत से कह चुके हैं कि एक सेक्शन में मामला बनता ही नहीं था और यदि यह मामला बनता तो तभी अन्य सेक्शन में मामला चलाया जाता। एक सेक्शन में मामला न बनने के चलते कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी गई और कानून मंत्री ने भी अपने पत्र में कहा कि मामले में कार्रवाई की जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले की पेशियों पर अदालत ने सीबीआई को वह पत्र अदालत में पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर मामला बंद किया जाने की अर्जी अदालत में दी गई है। सीबीआई ने यह पत्र अदालत में पेश किया। और वह पत्र भी अदालत में पेश किया जो कानून मंत्रालय को भेजा गया था। इस पत्र में मामला चलाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा था कि मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि कार्रवाई की जरूरत नहीं है।उल्लेखनीय है कि सीबीआई के विशेष जज दर्शन सिंह की अदालत में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। अदालत ने शिकायतकर्ता अमरीक सिंह को नोटिस जारी करके जबाव मांगा था। इसी बीच हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन ने क्लोजर र्पिोट पर आपत्ति जताई थी और अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से इजाजत मांगी थी। इस पर बहस शुरू हुई थी और क्लोजर रिपोर्ट पर अभी तक बहस जारी है।

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