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फर्जी संस्थानों के नाम पर बॉस्टन गए 40 छात्र

कार्यालय संवाददाता चंडीगढ़बॉस्टन के विवाद में हर रोज एक नया राज खुल रहा है। यौनाचार के मामले में पकड़े गए नितिन जिंदल का राज खुलने के बाद पीयू प्रशासन को आयोजकों से जो जानकारियां मिली हैं, वे कई बड़े राज खोल रही हैं।आयोजनकारी छात्र संगठन ‘हनमन’ की ओर से जानकारी मिली है कि पंजाब यूनिवर्सिटी से कुल चार टीमें पहुंची थी। इनमें यूनिवर्सिटी इंस्टीटय़ूट ऑफ लीगल स्टडीज से कुल 21 छात्रों का डेलीगेशन गया था जबकि पीयू के नाम पर कुल 61 छात्रों ने कांफ्रेंस में हिस्सा लिया। शेष 40 छात्रों ने अपना पंजीकरण यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ और पीयू स्कूल ऑफ लॉज नाम से कराया।हनमन के महासचिव की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि वे इस मामले की गंभीरता को अब समझ रहे हैं। पहले तो उन्होंने इसे बिल्कुल सामान्य लिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने पीयू को भेजे पत्र में यह भी कहा है कि इस कांफ्रेंस में हिस्सा लेने की खातिर उन्होंने ‘गुड फेथ’ के तहत कोई कागजात भी नहीं मांगे थे, लेकिन इस बार की घटना ने उन्हें काफी कुछ सिखाया है। अगली बार से वे पीयू से आने वाली टीम का पूरा ब्यौरा पीयू प्रशासन से मांगेंगे। हनमन का जवाब आने के बाद से पीयू प्रशासन भी सकते में है। आखिरकार पीयू के छात्रों ने किस तरह से यह फर्जीवाड़ा किया और औचित्य में नहीं रहने वाले संस्थानों का नाम सृजित कर लिया और इसकी बदौलत अमेरिका तक घूम आए।सिंडिकेट में इस मामले में चर्चा के बाद माना जा रहा है कि छात्रों के स्वदेश लौटने के बाद सभी 40 छात्रों पर यूनिवर्सिटी कड़ा कदम उठाएगी। हनमन की ओर से सभी 40 छात्रों की सूची पीयू तक पहुंच चुकी है। फर्जी विभाग से जाने वालों में दुराचार का आरोपी नितिन जिंदल और सोपू प्रधान बरींद्र सिंह ढिल्लों भी शामिल है।

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