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अपहरण, फिरौती..फिर फंसे अपराधी सेक्टर-36 थाना पुलिस ने मोहाली से दबोचा फोन

कार्यालय संवाददाताचंडीगढ़। पहले 10 साल के मासूम का अपहरण किया और फिर चार दिन बाद उसके परिजनों से फिरौती मांगी। सूचना पुलिस को मिली और फिर जाल बिछा दिया गया। फिरौती मांगने के 12 घंटे के अंदर ही पुलिस ने न सिर्फ मासूम सुमित को सकुशल बरामद कर लिया बल्कि आरोपियों को भी दबोच लिया। दोनों ने बच्चों को मोहाली फेज-नौ में किराए का मकान लेकर रखा था। बच्चों को पाकर जूस की दुकान चलाने वाले जवाहर गुप्ता के चेहर पर नई चमक थी और वे अभिभूत थे पुलिस की सफलता से।‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ :दोनों आरोपी मौसेरे भाई हैं। पहले का नाम आदित्य है और दूसरा धर्मेश कुमार है। धर्मेश दिल्ली में रहता है और यहां कुछ ही दिनों पहले आया था। उनका घर फेज-11, मोहाली में है लेकिन वे यहां अपराध के ही सिलसिले में थे। दोनों की एक दिन की रिमांड पुलिस ने ली है। पूछताछ में और खुलासे हो सकते हैं।चार दिन बाद मांगी फिरौती :दोनों आरोपियों ने 10 साल के बच्चों को उसके सेक्टर-52 स्थिति घर से उठाया था। तीन फरवरी को ही वे बच्चों को उठा कर ले गए थे। किडनैपिंग के चौथे दिन, छह फरवरी को पहले उन्होंने फोन कर दो लाख रुपए फिरौती मांगी। इसके बाद दिल्ली के बैंक का एकाउंट नंबर एसएमएस से दिया, जिसमें पैसा जमा करवाना था। ‘अनाड़ी नहीं थे अपहरणकर्ता’:आरोपियों ने एक फरवरी को ही किराए पर मकान लिया था। इसके साथ ही वे कई दिनों से इलाके की रेकी कर रहे थे। शिकार बच्चों पर नजर रखने के बाद उसके घर के सामने से उसे चाकलेट देकर उठाया था। उसे जान से मारने की धमकी देकर कमरे में बंद रखा था।बड़बोलापन ही बना मुसीबत का कारण :वास्तव में जवाहर ने घर में कुछ पैसे रखे थे और इसके साथ ही वे चर्चा भी कर रहे थे। दो लाख की चर्चा बच्चों ने सुन ली थी। यही बात उसने आरोपियों को बताई कि उसके पिता ने घर में दो लाख रुपए रखे हैं। उसी पैसे पर आरोपियों की नजर थी। बातों में फंसाकर दबोचा :पुलिस ने सुमित की गुमशुदगी दर्ज की थी। इसके बाद जब फिरौती का कॉल आई तो उसका पिता डर गया। उसके पास पैसे नहीं थे और उन्होंने पुलिस को बता दिया। पुलिस ने जाल बिछाया और अपनी बातों में फंसा कर जगह का पता कर लिया। रात एक बजे छापा मारकर गिरफ्तारी और बरामदगी हुई।सावधान तो सबको रहना होगा :भ् बच्चों के सामने न करें पैसों आदि की बातें।भ् अनजान आदमी को घर के पास देख सावधान।भ् आसपास के किराएदारों पर रखें नजर।भ् बच्चों की दिनचर्या पर पूरा नियंत्रण रखना जरूरी।भ् अनजान लोगों से बच्चों को न बात करने की दें सलाह।भ् किराए पर मकान देने से पहले वेरिफिकेशन जरूरी।भ् किराएदार का पूरा ब्यौरा पुलिस थानें में भी दें।‘यह काफी संजीदा मामला था। एक बच्चों की जान खतरे में थी और हर एक कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा था। चंडीगढ़ पुलिस के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। बच्चों को बचाना सबसे बड़ा चैलेंज था।’जे.एस. खरा, डीएसपी साउथ

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