DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रेम को पढ़ा मगर कबीर को पढ़ा नहीं..

सरस महोत्सव में सरस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजितहिन्दुस्तान संवाद लखनऊग्राम विकास विभाग की ओर से अलीगंज के सेक्टर-ओ पार्क में रविवार को ‘सरस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कविता पाठ करके एक ओर जहाँ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया तो दूसरी ओर जन मानस से जुड़ी पंक्तियाँ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।कवि सम्मेलन का मंच संचालन कवि सर्वेश अस्थाना ने किया। उन्होंने ‘पक्षियों का हौसला ही उनकी परवाज होता है, हर एक का उड़ने का अपना अलग अन्दाज होता है। सुबह की चहचआहट से जिन्दगी का आगाज होता है..’ सुनाकर कार्यक्रम का आगाज किया। विनोद विख्यात ने ‘पैसे वाले न्याय पा रहे, गाज गिरे कंगालों पर, वादी का हित है सर्वोच्च लिखा है बस दीवालों पर..’ सुनाकर वाहवाही लूटी। नीतीश्वर कुमार ने जहाँ ‘ये साख है नई-नई, मोहब्बतों के नाम की, तलाश थी बयार की, अच्छा हुआ तू आ गई..’ सुनाकर तालियाँ बटोरीं तो दूसरी ओर राकेश वाजपेई ने ‘ये जो पेपर वेट है बुद्धी से बिलकुल ठेठ है, फिर भी अपना आधार इतना मजबूत बनाए है, कितने ही आदेश पत्रों को अपने नीचे दबाए है..’ पंक्तियाँ सुनाकर सरकारी महकमों की पोल खोली। डॉ. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने ‘लूट मार होती रही, लुटता रहा बाजार, थाने में था नहीं कोई थानेदार..’ सुनाकर पुलिस की कार्यशैली पर टिप्पणी की। व्यंजना शुक्ला ने ‘वो तोड़ती है पत्थरों की पीर को पढ़ा नहीं, प्रेम को पढ़ा मगर कबीर को पढ़ा नहीं..’ सुनाया। कवि सम्मेलन में आशीष भदौरिया, आशीष अनल, नेहा भरद्वाज, मनीष शुक्ल, डॉ. अखिलेश ‘अखिल’ ने भी रचनाएँ सुनाईं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: प्रेम को पढ़ा मगर कबीर को पढ़ा नहीं..