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कई साल बाद बंदियों को मिलेगा पारिश्रमिक शासन ने भुगतान के

सुशील सिंह लखनऊप्रदेश की जेलों में निरुद्ध बंदियों का चार साल से बकाया पारिश्रमिक का भुगतान होने जा रहा है? शासन ने बंदियों का पारिश्रमिक देने के लिए साढ़े पाँच करोड़ रुपए जेल मुख्यालय को दिए हैं। आईजी जेल सुलखान सिंह का कहना है कि 20 फीसदी पारिश्रमिक रोककर बाकी का भुगतान मार्च में ही कर दिया जाएगा।जेल मुख्यालय के आँकड़ाें के मुताबिक करीब 82 हजार बंदी प्रदेश की सेंट्रल एवं जिला जेलों में निरुद्ध हैं। नियमत: सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को रसोई, अन्न भण्डारण, कृषि, साफ सफाई, दफ्तर एवं जेल के अन्य कार्यो के लिए पारिश्रमिक दिया जाता है। पारिश्रमिक को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिसमें सामान्य श्रेणी में आने वाले को प्रतिदिन 10 रुपए, अकुशल श्रेणी को 13 एवं कुशल श्रेणी को 18 रुपए का भुगतान किए जाने का प्रावधान है। यह जेल अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि बीते चाल से बंदियों के पारिश्रमिक का भुगतान नहीं हो पाया। लेकिन इस साल मुख्यालय की पहल पर शासन ने बंदियों का रुका पारिश्रमिक वितरित करने के लिए 5.5 करोड़ रुपए दिए हैं। आईजी जेल सुलखान सिंह का कहना है कि बंदियों को काम के एवज में पारिश्रमिक देने का प्रावधान है। सभी जेल अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वह समय से उनके पारिश्रमिक का भुगतान कराएँ।उद्योगों का पारिश्रमिक 30 लाख आदर्श कारागार के अलावा सेंट्रल जेल बरेली, आगरा, फतेहगढ़, नैनी व वाराणसी में लगे विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले बंदियों के पारिश्रमिक के लिए शासन ने अलग से तीस लाख रुपए दिए गए हैं। इन जेलों में दरी, चद्दर, कम्बल, गमछा, टेंट का सामान, फर्नीचर, पावरलूम, बर्तन, साबुन, जूता, फिनाइल, सिलाई उद्योग समेत कई उद्योगों के कारखाने लगे हैं।ं

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