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सारस को बचाने के लिए होंगे शोध गोष्ठी में सारस प्रोटेक्शन

कार्यालय संवाददाता लखनऊराज्य पक्षी सारस को बचाने के लिए सारस प्रोटेक्शन सोसाइटी और वाइल्ड लाइफ इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से रविवार को दो दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें सारस को बचाने के लिए प्रदेश में विभिन्न प्रकार के शोध कार्य करने पर चर्चा हुई। वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञ, विवि के प्रोफेसर और संस्थाओं के करीब 30 सदस्यों ने इसमें भाग लिया।गोमती होटल में वाइल्ड लाइफ इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया, देहरादून के प्रो. बीसी चौधरी ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्रदेश को पश्चिम, पूरब, मध्य और बुंदेलखंड जैसे चार क्षेत्रों में बाँटकर उनमें शोध कार्य करने पर निर्णय किया गया। इसमें क्षेत्रीय और माइक्रो लेवल पर शोध कार्य किए जाएँगे। माइक्रो लेवल पर होने वाले शोधों में खेती में कीटनाशकों के उपयोग से हो रहे सारस पक्षी को नुकसान का पता लगाया जाएगा, तो क्षेत्रीय स्तर पर वेटलैंड में ही क्यों अधिक सारस मिलते हैं आदि की पड़ताल की जाएगी। श्री चौधरी ने बताया कि तराई क्षेत्र में मिलने वाला यह पक्षी मध्य यूपी और बुंदेलखण्ड में अधिक पाया जाता है। देश में इनकी संख्या लगभग 12 हजार है जिसमें से छह से आठ हजार सारस अकेले यूपी में ही है। इसलिए इस प्रजाति को बचाने के प्रयास किए जाने की जरूरत है। कार्यक्रम में वन विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन बीके पटनायक भी शामिल हुए। दो दिवसीय कार्यक्रम में बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, इंटरनेशनल क्रेन फाउण्डेशन, अलीगढ़ विवि के प्रोफेसर, गुजरात और राजस्थान राज्यों के वाइल्ड लाइफ मैनेजर भी इसमें शामिल हुए। जिन्होंने सारस को बचाने के वैज्ञानिक तरीकों को इस्तेमाल करने की बातें कहीं।

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  • Web Title: सारस को बचाने के लिए होंगे शोध गोष्ठी में सारस प्रोटेक्शन