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संशोधित-कैबिनेट निर्णय

एक दर्जन निगमों-संस्थाओं को छठा वेतनमानविशेष संवाददाता लखनऊप्रदेश सरकार ने करीब एक दर्जन निगमों-संस्थाओं के कर्मचारियों को छठा वेतनमान देने का फैसला किया है। इनमें उत्तर प्रदेश जल निगम, नलकूप निगम, बीज विकास निगम, समाज कल्याण निर्माण निगम, राज्य सेतु निगम, यूपीडेस्को, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम और पिकप शामिल हैं। गीडा कर्मचारियों को पंचम वेतनमान मिलेगा। मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन निगमों को छठा वेतनमान देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस फैसले से इन निगमों के कई हजार अधिकारी और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। इनको राज्य कर्मचारियों की तरह एचआरए और सीसीए मिलेगा। छठा वेतनमान पहली जनवरी 2006 से प्रकल्पित आधार पर पुनरीक्षित किया गया है। इसका लाभ शासनादेश 16 अक्टूबर 2009 के आधार पर मिलेगा। एरियर नहीं मिलेगा। सरकार छठे वेतनमान के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी। ---2--डीएम और कमिश्नर के अधिकार बढ़े, जमींदारी विनाश अधिनियम में संशोधन ग्रामीण सीलिंग के मामले निपटाने के लिए विशेष अधिवक्ता नियुक्त होंगेविशेष संवाददाता राज्य मुख्यालय कैबिनेट ने डीएम और कमिश्नर के अधिकार बढ़ाने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत शासन को प्राप्त किन्ही व सभी वस्तुओं के पुनर्ग्रहण के अधिकार अब जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को दे दिए गए हैं। इसके तहत जिलाधिकारी ऐसी वस्तु या वस्तुएँ जिनका मूल्य दस लाख रुपए से अधिक न हो तथा आयुक्त ऐसी वस्तु या वस्तुएँ जिनका मूल्य 10 लाख रुपए से अधिक न हो, का पुनग्र्रहण कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस समय ग्रामसभा और स्थानीय प्राधिकारियों की भूमि को पुनग्र्रहीत करने का अधिकार राज्य सरकार को प्राप्त है। ग्रामीण सीलिंग (कृषि भूमि सीमारोपण) मुकदमों के तेजी से निस्तारण के लिए विशेष अधिवक्ताओं की नियुक्ति किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। इसके तहत प्रभावी पैरवी के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद और लखनऊ पीठ में पाँच-पाँच प्राइवेट अधिवक्ताओं को तैनात किया जाएगा। उच्च न्यायालय में करीब चार हजार रिट याचिकाएँ लंबे समय से लंबित हैं। जिनमें 80 हजार एकड़ की भूमि विवादित है। स्थगनादेशों के चलते खातेदारों की अतिरिक्त घोषित भूमि पर राज्य सरकार द्वारा कब्जा नहीं लिया जा सका है। कब्जा मिलने पर यह भूमि गरीबों को बाँटी जा सकेगी। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण संबंधी मामलों में समयबद्ध रूप से फैसला करने के लिए अधिकारों को जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को दे दिया है। इससे भूमि अधिग्रहण के मामलों में देरी नहीं होगी। इसके लिए जिलाधिकारी स्तर पर अभिनिर्णय की जाँच व पूर्वानुमोदन पर प्राप्त की जाने वाली धनराशि की सीमा दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया गया है। दस करोड़ से अधिक राशि के मामले भूमि अध्याप्ति निदेशालय के माध्यम से राजस्व परिषद द्वारा की जाने वाली वर्तमान व्यवस्था को अब मंडलायुक्त देखेंगे। यह अधिकार मंडलायुक्तों को दे दिया गया है। ---3----‘अपर गंगा एक्सप्रेस वे’ का नाम बदला ‘कानपुर-फतेहपुर एक्सप्रेस वे’ नोडल एजेंसी तय विशेष संवाददाता राज्य मुख्यालय‘अपर गंगा नहर एक्सप्रेस वे’ का नाम अब ‘आठ लेन प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस वे’ होगा। शनिवार को कैबनेट में लिए गए निर्णय के अनुसार यह अपर गंगा नहर के दाएँ तट पर देहरा के समीप ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे से उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा (सीमा से दस किमी पूर्व) तक आठ लेन प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस वे का नाम अपर गंगा नहर के दाएँ तट पर सनौटा ब्रिज (ग्रेटर नोएडा) से उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा के पूर्व पुरकाजी (जनपद मुजफ्फरनगर) के निकट तक बनेगा। इसके लिए सिंचाई विभाग की भूमि मुफ्त दी जाएगी। इसके किनारे सात स्थानों पर जल विद्युत परियोजनाएँलगेंगी। इसकी लंबाई 141 किलोमीटर और इसकी लागत 3960 करोड़ रुपए होगी। कैबिनेट ने तीन िलक एक्सप्रेस वे को भी परियोजना का भाग माने जाने की स्वीकृति दे दी है। जिसमें मेरठ इंटरनेशनल एयरपोर्ट एवं डीएफसी लिंक एक्सप्रेस वे तथा देवबंद लिंक एक्सप्रेस वे शामिल है। दूसरी ओर सनौटा ब्रिज (ग्रेटर नोएडा) से कानपुर-फतेहपुर तक एक्सप्रेस वे के कार्यान्वयन के लिए यूपीडा को नोडल एजेंसी बनाने का फैसला किया गया है। कैबिनेट में विधानमंडल के पटल पर रखे जाने के लिए राज्य सूचना आयोग की 2006-07 की रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी गई है।

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