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जूते की हील में गांजा और स्मैक बेउर जेल के कैदियों

वरीय संवाददाता पटना। जूते की हील में गांजा-स्मैक और सिम। बात किसी ब्रांडेड या स्टाइलिश जूते की नहीं बल्कि बेउर जेल के कुछ कैदियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष किस्म के जूते या सेंडिल की है। इन जूतों की बनावट ऐसी होती है कि हील के समीप खाली स्थान बनाया जाता है। उसी में गांजा या स्मैक की पुडिम्या भर ली जाती है। मादक पदार्थो के साथ-साथ कभी-कभी मोबाइल का सिम आदि भी उसमें रखा जाता है। इसके बाद खाली स्थान को पहले से निर्मित चमड़े के ढक्कन को इस तरह से लगा दिया जाता है कि जूता पहनने पर उस ओर किसी के शक होने की कोई गुंजाईश ही नहीं रहे। बहरहाल कैदियों के शातिर फॉर्मूले से जेल प्रशासन सकते में है। एक नहीं बल्कि कई खुराफाती तकनीकों का इजाद करके कैदियों द्वारा जेल के अंदर मादक पदार्थ या अन्य अवैध समान ले जाने की कोशिश की जाती है। आलम यह है कि हवाई मार्ग से भी मादक पदार्थो की बरसात होती है। बीते शनिवार को बेउर जेल में बाहर से फेंकी गई टेनिस बॉल इसी सच्चाई पर मुहर लगाती है। जेलकर्मी उस समय चौंक गये जब जांच में बॉल के अंदर गांजा और स्मैक मिले। दरअसल जेल से बाहर निकलने या वापस आने पर तीन गेटों पर सघन तलाशी होती है। इससे अवैध सामान अंदर ले जाना कैदियों के लिए मुश्किल हो जाता है। नतीजतन कभी मुर्गे की पेट के अंदर तो कभी खाने की टिफिन में मोबाइल छिपा कर जेल के अंदर ले जाये जाते हैं। खास बात यह है कि इस अवैध खेल में कुछ जेलकर्मियों की साठगांठ से कैदी नशा करने से लेकर मोबाइल तक का इस्तेमाल करते हैं। पिछले वर्ष जेल का ही एक दर्जी कैदियों तक गांजा सप्लाई करने के प्रयास में गेट पर तलाशी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। बहरहाल ये घटनाएं तो महज बानगी हैं हकीकत में इसकी फेहरिस्त काफी लंबी है। जेल अधिकारियों ने बताया कि नियमित वार्डो की तलाशी के अलावा परिसर में चौकसी और कड़ी कर दी गई है। इसी का नतीजा है कि अब हवा के रास्ते भी कैदियों का मकसद सफल नहीं होने दिया जा रहा है।ं

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  • Web Title: जूते की हील में गांजा और स्मैक बेउर जेल के कैदियों