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डायरिया में बच्चों को देते रहे जीवन रक्षक घोल-विशेषज्ञ दवाओं का

िहन्दुस्तान प्रितिनिधपटना। छोटे बच्चों में डायिरया होने पर उन्हें जीवन रक्षक घोल (ओआरएस) औरजिंंक (दवा) देते रहना चािहए क्योंकि बच्चों में अिधकांश डायिरया खुद ही ठीक होने वाला होता है। िचकित्सक एंटीबॉयिटक और अन्य दवाएं देते रहते हैं। दवाओं का कोई रोल नहीं होता। बैक्टिरया या वायरस का असर खत्म होने पर डायिरया भी खुद ठीक हो जाता है। यह जानकारी इिंडयन एकेडेमी ऑफ पेिडएिट्रक्स (िबहार शाखा) की ओर से आयोिजत कार्यशाला में िशशु रोग िवशेषज्ञों ने दी। कार्यशाला में बच्चों में डायिरया मैनेजमेंट पर चर्चा हुई। कार्यशाला में कोलकाता, िदल्ली और राज्य के िविभन्नजिंलों के िशशु रोग िवशेषज्ञों ने िहस्सा िलया। वक्ताओं में डा. एके जायसवाल, डा. एसपी श्रीवास्तव, डा. अरुण कुमार ठाकुर, डा. उत्पलकांत िसंह, डा. एसपी िमश्रा, डा. वीपी जायसवाल, डा. बीरेन्द्र कुमार िसंह, डा. िवजय कुमार जैन, डा. ब्रजमोहन, डा. राम उदय आिद ने इस िवषय पर चर्चा की। बताया गया कि डायिरया शुरु होने पर बच्चों को दो सप्ताह तक जीवन रक्षक घोल के साथजिंंक (िजंक वाली दवा) देते रहना चािहए। इसके अलावा डायिरया के दौरान बच्चों को पौिष्टक आहार और मां का दूध भी देते रहना चािहए। देखा जाता है कि डायिरया होने पर बच्चों को माताएं खाना देना बंद कर देती हैं। उनका मानना होता है कि भोजन देने पर डायिरया बढ़ जाएगा, लेकिन यह भ्रम है। बच्चाा कमजोर लगे तो िचकित्सक की सलाह तुरंत लेनी चािहए। कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा हुई कि डायिरया के दौरान जीवन रक्षक घोल औरजिंंक देने का सूबे में प्रचार किया जाना चािहए। िचकित्सकों का कहना है कि इसके िलए अब बाजार में पहले से बिढ़या घोल के िलए पाउडर आ गया है।

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  • Web Title: डायरिया में बच्चों को देते रहे जीवन रक्षक घोल-विशेषज्ञ दवाओं का