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दाल नहीं गलने वाली बड़े भाई की

‘. आसानी से अणे मार्ग नहीं छोडूंगा’पटना (हि.ब्यू.)। ‘बड़े भाई का एक अणे मार्ग पहुंचने का सपना अब पूरा नहीं होने वाला। मैं इतनी आसानी से अणे मार्ग नहीं छोड़ने वाला।’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरे मूड में थे। बड़े भाई ‘लालू प्रसाद’ का बगैर नाम लिए उन्होंने उनपर जमकर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि बड़े भाई एक ही रट लगाए हुए हैं और उनका एक ही मकसद है कि कैसे छप से अणे मार्ग पहुंच जाएं। मैंने तो उन्हें बगल में ही स्थान दे दिया लेकिन उनका मन नहीं लग रहा। उनके मन में अणे मार्ग ही घूम रहा है। पर ध्यान रखें, अब उनकी दाल नहीं गलने वाली। महंगाई पर राजद के आंदोलन को हास्यास्पद बताते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि छह माह पूर्व की कीमत पर लाने तक आंदोलन की घोषणा की गई है। वस्तुओं की कीमत मई 2004 के स्तर पर लाने तक आंदोलन क्यों नहीं? बड़े भाई को छह माह ही क्यों ध्यान में है? पांच साल दिल्ली में कांग्रेस के साथ मौज किए और अब उन्हें महंगाई की याद आ रही है। सभा में दूर से आवाज आती है,‘आदिवासी के बारे में भी बोलिए?‘. तत्काल नीतीश कुमार ने जवाब दिया,‘आदिवासी सम्मेलन में न! फिर उन्होंने कहा कि आदिवासियों को वे इस तरह प्रेम से रखना चाहते हैं कि झारखंड के आदिवासी भी सोंचे कि बिहार में आदिवासी बेहतर ढंग से रह रहे हैं।

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