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खतरे में गंगा का अस्तित्व, जलमार्ग ठप

बक्सर (पटना), मुकेश चंद्रमोक्ष दायिनी गंगा के अस्तित्व पर अब खतरा मंडराने लगा है। बक्सर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, चुनार सहित कई जगहों पर गंगा में प्रवाह की जगह टीला व पगडंडियां बनने लगी है। इसके कारण कुछ साल पहले शुरू हुआ कोलाकाता-पटना, वाराणसी-इलाहाबाद जलमार्ग भी ठप हो गया है। माल की ढुआई बाधित हो गई है। दर्जनभर से अधिक स्थानों पर ताल, पोखरे या फिर छिछले गड्डे में सिमटी गंगा कही तीन तो कही पांच भाग में बट गई है। मालवाहक जहाजों के फंसने से जगह-जगह रेत की खुदाई तो शुरू हुई, लेकिन फिर भी जलमार्ग से व्यापार ठप हो गया है।जिले के अहिरौली, अर्जुनपुर, मझरयिा, चुनार, गाजीपुर के पक्कापुल, जमानिया, पुरैना, सैदपुर, मझवां, बलिया शहर के सामने, श्रीरामपुर घाट सहित कई जगहों पर पतित पावनी गंगा ने नाले का रूप ले लिया है। हालांकि जलमार्ग को सुचारू रूप से चलाने के लिए बिहार के अलावा आसाम के कारीगरों के अलावा गंडक सहित विभिन्न ड्रेसर मशीनों ने गंगा में खुदाई की, लेकिन सब धरी की धरी रह गई। नदी के पाट को चौड़ा करने के लिए कटिंग भी गई। इस जलमार्ग से जूट, कपास, कोयला और सीमेंट का भी आयात-निर्यात हो रहा था, जो अब बंद है। यहीं पिछले साल विदेशी सैलानियों को परिभ्रमण के लिए यह जलमार्ग भा गया था, लेकिन जनवरी के दौरा में ही बक्सर, गाजीपुर, बनारस में कम पानी होने के चलते शहर से बाहर ही क्रूज को रोक दिया गया। यहां पर बिहार पर्यटक निगम के जिला प्रबंधक शंभूनाथ ने बताया कि मार्च के दौरा के दौरान भी सैलानी पटना में ही क्रूज छोड़ दिए थे और पथमार्ग से बक्सर व बनारस का भ्रमण किए। गंडक सर्वेयर टीम के इंचार्ज गुरुमुख सिंह ने भी माना हैं कि जबतक गंगा में पानी का लेबल और प्रवाह बढ़ेगा तबतक जलमार्ग ढंग से नहीं चल सकेगा। प्रवाह कम होने से नदी में मिट्टी जम जाती है और जगह-जगह टीले बन गए है। इसके कारण जलमार्ग अवरूध हो रहा है। सर्वेयर राजीव सिंगल का कहना है कि इस रूट में कई जगहों पर टीला बन गया है।

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