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जनता के बीच से पैदा हो नया नेतृत्व जेपी आंदोलनकारियों का

पटना (हि.ब्यू.)। सभी राजनीतिक दल चोर-चोर मौसेरे भाई हैं और इन्होंने संसद व विधानसभा को अनर्गल बहस एवं नौटंकी का अड्डा बना दिया है। इसलिए 1974 आंदोलन के कार्यक्रमों की तरह गांव-गांव जनता सरकारें बननी चाहिए जो शांतिपूर्ण संघर्ष के रास्ते प्रशासन पर बर्चस्व बनाकर सरकारी कार्यक्रमों को लागू करवाए और भ्रष्ट तंत्र को बेनकाब करे। सम्पूर्ण क्रांति के संघर्ष को सघन करते हुए आम जनता के बीच से नए नेतृत्व पैदा करने की घोषणा के साथ सम्पूर्ण क्रांति मंच का दो दिवसीय शिविर सम्पन्न हो गया। जेपी आंदोलनकारियों के इस दो दिवसीय चिंतन शिविर की अध्यक्षता भवेश चन्द्र प्रसाद ने की।उपाध्यक्ष कुमार अनुमप के मुताबिक शिविर में व्यवस्था परिवर्तन, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी एवं प्रतिनिधि वापसी के अधिकार व भूमि सुधार के कार्यक्रमों को सामने रखकर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार लड़ाने पर भी चर्चा हुई ताकि चुनाव के मुद्दों में सम्पूर्ण क्रांति पर बहस छेड़ी जा सके। रामप्रवेश सिंह ने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार की बात की जबकि सीताराम प्रसाद अकेला ने नक्सलवादी व माओवादियों से अपील की कि वे हिंसा छोडक़र सम्पूर्ण क्रांति े में शामिल हों। शंभू सिंह, बमभोला यादव, राम बाबू राय, बीनू चैनपुरी और जगदीश यादव ने सूचना के अधिकार को जनजन तक पहुंचा कर भ्रष्ट व्यवस्था पर अंकुश लगाने का रखा जबकि यमुना प्रसाद, अरविंद, ओमप्रकाश पोद्दार, कांता सिंह और पलटन आजाद ने न्यापालिका में व्याप्त अनाचार व अविश्वास को खतरना बताते हुए न्यायपालिका को सचेत किया।

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