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बीमा से संभव हो सकेगा बच्चों के दिल की बीमारियों

अजय कुमार सिंहपटना। दिल की जटिल बीमारियों से जूझ रहे बच्चों का इलाज तभी संभव हो सकेगा जब आंध्रप्रदेश की तरह यहां भी स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था की जाय। जब तक स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था नहीं होगी तब तक बच्चों की जटिल बीमारियों का इलाज संभव नहीं हो सकेगा। आंध्रप्रदेश ने इस क्षेत्र में मिशाल पेश किया है। यहां ‘राजीवगांधी आरोग्य श्री’ स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई है। इसके तहत किसी भी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में बच्चों का इलाज कराया जा सकता है। मरीज के परिवार को घर से एक पैसा नहीं देना पड़ता। यह जानकारी सेवेन हिल्स हॉस्पीटल, मुंबई के पेडिएट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ. के.शिव प्रकाश ने हिन्दुस्तान से खास बातचीत में दी। डॉ. प्रकाश राजधानी में दिल के मरीज छोटे बच्चों का ऑपरेशन करने के लिए आए हैं। उन्होंने बताया कि बिहार की 90 फीसदी जनसंख्या को एडवांस हॉर्ट केयर की व्यस्था नही है। बिहार की अधिकांश आबादी गांवों में रहती है। यदि आंध्रप्रदेश वाली स्कीम यहां लागू हो जाय तो यहां भी सभी बच्चों का इलाज हो सके गा क्योंकि यदि छोटे बच्चों को दिल बीमारी लगती है तो उसके इलाज में डेढ़ से दो लाख रुपए खर्च आते हैं और गरीब बच्चों के परिवार वालों के लिए यह राशि जुगाड़ करना शायद संभव नहीं होता होगा। डॉ. शिव प्रकाश के मुताबिक छोटे बच्चों में अमूमन जन्मजात दो तरह की बीमारी लगती है। इनमें हॉर्ट में छेद (टेट्रालॉजी फैलोट) प्रमुख है। इसमें बच्चों के नाखून और होठ में नीलापन आ जाता है जबकि हॉर्ट में बड़ा छेद (वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट) होने पर बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। दोनों का इलाज एक मात्र आपरेशन ही है। यह बीमारी हर राज्य के बच्चों में हैं।

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