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पांच जिले में धीमी गति से चल रही भाजपा की

पटना(हि.ब्यू.)। प्रदेश अध्यक्ष की तरह ही पांच जिलों में भाजपा की चुनावी गाड़ी धीमी गति से चल रही है। कहीं मंडल के चुनाव पूरे नहीं हुए हैं तो कुछ जिलों में वरिष्ठ नेताओं की खींचतान से मामला लटका है। वैसे पटना महानगर के बारे में कहा जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद ही यहां जिलाध्यक्ष बनाने की परंपरा सी बन गई है। इस बार भी कुछ ऐसी ही स्थिति दिख रही है। संगठन चुनाव में उत्तर बिहार के जिले आगे रहे। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह कहते हैं कि 43 में से 38 जिलों में चुनाव कराकर पार्टी ने बेहतर तस्वीर पेश की है। अन्य जिलों में भी जल्द ही चुनाव करा लिए जाएंगे। महीनों की मशक्कत के बाद भी भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की खोज पूरी नहीं हो पाई है। संगठन के हिसाब से भाजपा के 43 जिले हैं। हालांकि पांच जिलों को छोड़ अन्य जगह तेजी से चुनाव करा लिए गए। उत्तर बिहार के किसी जिले में चुनाव नहीं लटका है। दरभंगा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर सहित अन्य जिलों में जिलाध्यक्ष का चुनाव करा लिया गया। लेकिन पटना महानगर, भागलपुर, लखीसराय, औरंगाबाद एवं नालंदा में चुनाव नहीं हो सका है। औरंगाबाद में कुछ वरिष्ठ नेताओं की खींचतान में विवाद इतना बढ़ गया कि प्रदेश टीम ने फिलहाल वहां चुनाव स्थगित कर रखा है। भागलपुर में भी कुछ मंडलों का मामला फंसा है। नालंदा में 10 अप्रैल से पहले चुनाव होने की उम्मीद है। पटना महानगर अभी मंडल चुनाव की स्थिति में ही है। राधामोहन सिंह कहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष के लिए 50 फीसदी जिले में चुनाव होना जरूरी है। यहां तो 38 जिलों में चुनाव करा लिया गया है।

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