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कला इतिहास के विकास में बिहार का योगदान खास बिहार

कार्यालय संवाददातापटना।भारतीय इतिहास ही नहीं बल्कि कला के इतिहास के विकास में भी बिहार का खास योगदान है। पटना, वैशाली, नालन्दा व गया में उत्खनन से मिले पुरावशेष व कलाकृतियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह कहना है भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के महानिदेशक डा. गौतम सेनगुप्ता का। उन्होंने राज्य कला व संस्कृति विभाग के संग्रहालय निदेशालय की ओर से राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान में आयोजित बिहार की मृण्मूर्ति व अष्टधातु कला विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उक्त बातें कहीं। पटना संग्रहालय के अपर निदेशक डा. उमेशचंद्र द्विवेदी ने पटना लौटने के बाद यह जानकारी दी। उनके मुताबिक पहली बार संग्रहालय निदेशालय ने राज्य के बाहर इस तरह की गोष्ठी आयोजित की। राज्य की कल्चरल ब्रांडिंग योजना के तहत यह आयोजन किया गया ताकि बाहर के लोग भी बिहार की समृद्ध कला व संस्कृति से रू-ब -रू हो सकें। संगोष्ठी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त महानिदेशक डा.बीआर मणि, जेएस गहलौत , डा. अरविंद महाजन, पूर्व एएसआई निदेशक डा. अमरेन्द्ननाथ, भारत कला भवन वाराणसी के निदेशक डा. देवप्रकाश शर्मा, डा. माधुरी शर्मा, डा. विपिन कुमार जमुआर, राष्ट्रीय संग्रहालय की डा. अनुपा पांडेय, अजीत कु मार प्रसाद, सहायक पुरातत्वविद एएसआई विनय कुमार, राष्ट्रीय संग्रहालय के पूर्व निदेशक डा . एसएस विश्वास, संजीव कुमार सिंह व डा.चित्तरंजन प्रसाद सिन्हा,डा. परशुराम पांडेय आदि ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर सचिव कला व संस्कृति विवेक कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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