DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गर्भस्थ शिशुओं में होने वाली बीमारियों का पता लगाना हुआ

िहन्दुस्तान प्रितिनिधपटना। गर्भ में पल रहे बच्चों को कोई जन्मजात बीमारी तो नहीं हो रही है या िफर उसके हृदय में कोई िवकृित तो नहीं है, इसका पता पैदा होने से पहले ही लगाया जा सकता है। यही नहीं उसका इलाज भी संभव है ताकि पैदा होने के बाद बच्चों को कोई ऐसी बीमारी का सामना नहीं करना पड़े। 13 से 18 सप्ताह के गर्भ में पल रहे बच्चों के हृदय में कोई िवकृित है कि नहीं, इसका पता लगाया जा सकता है और गर्भ में ही उसका इलाज किया जा सकता है। िविभन्न शहरों से आए िवशेषज्ञों ने इस तरह की अपनी राय जािहर की। मौका था िबहार स्टेट चैप्टर आफ इिंडयन रेिडयोलॉिजकल एंड इमेिजंग एसोिसएशन के वािर्षक सम्मेलन का। सम्मेलन में चर्चा का िवषय था ‘िफटल मेिडसीन’। िवशेषज्ञों में संजय गांधी इंस्टीट्यूट, लखनऊ के डॉ. आरके गुप्ता, िदल्ली के डॉ. कृष्ण गोपाल, बंगलुरू के डॉ. वीरेन हिर सरस्वती, पीएमसीएच के सहायक प्राध्यापक डॉ. िमिथलेश प्रताप, डॉ. राजन चौधरी, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अमर कुमार िसंह, डॉ. अच्युतानंद झा आिद। डॉ. आरके गुप्ता ने कहा कि एमआरआई भी अब काफी िवकिसत हो गया। स्पेक्ट्रोस्कोपी के जिरए िसर में कैंसर और टीबी की पहचान की जाने लगी है। वहीं डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि िफटल कािर्डयोग्राफी के जिरए गर्भ में पल रहे बच्चों के हर्ट में क्या गड़बड़ी है उसका पता लगाया जा रहा है और समय रहते ही उसका इलाज किया जा रहा है। डॉ.वीरेन हिर सरस्वती ने रेिडयोलॉजी में आने वाली कानूनी पेचीदिगयों के बारे में जानकारी दी। डॉ.िमिथलेश प्रताप ने कहा कि िबहार में रेिडयोलॉजी के िवकास के िलए िनजी अस्पतालों और सरकार दोनों को आगे आना होगा। सूबे में अभी तक महज तीन ही एमआरआई मशीन है।जिंसमें एक पीएमसीएच में है। उन्होंने बड़े प्राइवेट अस्पतालों से इस क्षेत्र में आगे आने के िलए अपील की। सम्मेलन में एसोिसएशन का चुनाव हुआ। इसमें डॉ. राजन चौधरी अध्यक्ष चुने गए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गर्भस्थ शिशुओं में होने वाली बीमारियों का पता लगाना हुआ