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अपने गिरेबां में झांके अनिल शर्मा : रंजीत रंजन

पटना (हि.ब्यू.)। पूर्व सांसद व कांग्रेस महासचिव रंजीत रंजन ने कहा है कि अनिल शर्मा कांग्रेस के प्रति मेरी विश्वसनीयता पर अंगुली उठाने के पहले अपने गिरेबां में झांकें कि वे कांग्रेस के प्रति कटिबद्ध हैं कि नहीं? उन्होंने भी कभी इंदिरा गांधी का पुतला जलाया था और आज वहीं कांग्रेस को राह दिखा रहे हैं। श्रीमती रंजन ने कहा कि या तो प्रदेश अध्यक्ष की हिन्दी स्पष्ट नहीं है या फिर वे दुर्भावना से ग्रस्त हैं। इससे उन्हें दूसरों के भाषण में पार्टी के प्रति समर्पण नजर नहीं आती। जिस भाषण को अध्यक्ष कोट कर रहे हैं उसमें मेरे कहने का मतलब था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रति बिहार में लोगों का रुझान तेजी से हो रहा है। मैंने कहा था कि ये दोनों नेता बार-बार आकर लोगों को समझा नहीं सकते क्योंकि उनपर पूरे देश की जिम्मेवारी है। हमारे प्रदेश की इकाइयों से ऐसा चेहरा निकालना चाहिए जो कांग्रेस पार्टी का चेहरा हो। रंजीता रंजन ने कहा कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष की वाणी से लोगों को यह महसूस नहीं हो रहा है कि आप कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं या नहीं। कांग्रेस का भला चाहते हैं कि नहीं। आपके क्रियाकलाप से निजी स्वार्थ की बू आती है। यह पार्टी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश अध्यक्ष ही पार्टी में सामंजस्य नहीं बैठा सके। यह पार्टी हित में नहीं है। पूर्व सांसद ने कहा कि अध्यक्ष को किसी भी पदाधिकारी को बोलने की छूट देनी चाहिए थी और पूरा भाषण सुनना चाहिए था।

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