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विहंगम योग चेतन विज्ञान है: विज्ञानदेव महाराज

िहन्दुस्तान प्रितिनिध पटना सदगुरु सदाफलदेव िवहंगम योग संस्थान के संत िवज्ञानदेव महाराज ने कहा कि िवहंगम योग एक चेतन िवज्ञान है।जिंस प्रकार भौितक िवज्ञान से भौितक पदार्थो को जाना जा सकता है उसी प्रकार चेतन िवज्ञान से सभी चेतन पदार्थो की अनुभूित हो सकती है। अध्यात्म का सर्वोच्च ज्ञान तो चेतन िवज्ञान में िनिहत है। पुरुषार्थ से ही जीवन में मोक्ष संभव है। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष ही जीवन का आधार है। शुक्रवार को राजीव नगर नेपाली नगर में ित्रिदवसीय िवहंगम योग समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृित अत्यंत समृद्ध है। धर्मपूर्वक अर्थ व काम की प्रािप्त ही श्रेष्यकर है। अर्थ व काम की प्रासिंगकता आज भी है। िसर्फ शरीर की पुिष्ट व इिंद्रयों की तृिप्त ही जीवन का उद्देश्य नहीं है बिल्क मानव सेवा से ही जीवन सफल हो सकता है। आज के मानव िसर्फ भौितक दुिुनया के पीछे दौड़ रहे हैं। आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन भिक्त है। िबना प्रेम के भिक्त संभव नहीं है। प्रेम मानव जीवन की अमूल्य िनिध है। प्रेम का अभाव होने से अहंकार पैदा होता है। मानव जीवन में परस्पर प्रेम व सद्भावना परम आवश्यक है। दुर्भावना, ईष्र्या, द्वेष व घृणा को हटाकर जीवन में सद्भावना का िनर्माण होना चािहए। उन्होंने कहा कि योग से शरीर स्वस्थ होता है। योग की संपूर्णता का नाम ही िवहंगम योग है।ं

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