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बिहार के पशु की विदेशों में सप्लाई हिरण की सींग से

नीतीश कुमार सोनीपटना। बिहार के विभिन्न इलाकों से पशुओं की सप्लाई विदेशों तक की जा रही है। गाय-भैंस से लेकर हिरण की सींग और तेंदुआ के खाल तक की तस्करी हो रही है। यहां तक कि सुअर और बकरा/बकरी भी तस्करों के निशाने पर है। जानवरों की तस्करी के लिए भारत व नेपाल की खुली सीमा और भौगोलिक स्थिति तस्करों के लिए फायदेमंद है। बॉर्डर के रास्ते नेपाल, बांग्लादेश से लेकर उन देशों तक इन जानवरों या उनके अंगों की सप्लाई की जाती है जहां डिमांड होती है। कुछ विशेष पर्व-त्योहारों के अलावा अन्य उत्सवों पर कुछ चुिंनंदा देशों में गाय, भैंस आदि की मांग काफी बढ जाती है। खास बात यह भी है कि सीमावर्ती इलाके में कई जगहों पर मवेशियों का हाट-बाजार भी लगता है। यहां से तस्करों के एजेंट द्वारा अक्सर गाय, भैंस आदि खरीदे जाते हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी सस्ते जानवरों को खरीद कर बॉर्डर पार मुंहमागी कीमत में बेचा जाता है। नेपाल के साथ बेहतर संबंध होने के कारण अब तक कोई ऐसी समस्या नहीं हुई है जिससे सीमा पर कंटीले तारों की घेराबंदी या अन्य कदम उठाये जाते। इसका फायदा तस्करों को मिलता है और आसानी से वे चराते हुए बडी संख्या में जानवरों को बॉर्डर पार करा देते हैं। इसके अलावा वाहनों से भी जानवरों को ले जाते कई दफे पकडा गया है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन से ऐसे ही कई राज खुले हैं। तस्करी के दौरान पिछले 14 महीने में एक हजार छह जानवर (गाय, भैंस, सूअर और बकरी) एसएसबी द्वारा सरहदी क्षेत्र में पकडेम् गये हैं। इसके अलावा हिरण का सींग, तेंदुआ और हिरण के खाल आदि भी इसी की कडी है। पहाड़ी बकरियों की सींग तक तस्करी होती है। एसएसबी के आईजी (सीमांत मुख्यालय) श्याम सिंह के मुताबिक विशेष अभियान में पिछले वर्ष से अब तक कुल 83 पशु तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें इसी वर्ष पिछले जनवरी और फरवरी महीने में ही 48 तस्कर पकडे गये हैं। बॉर्डर पर बरामदगी : एक नजर वर्ष - जानवरों की बरामदगी - गिरफ्तार तस्कर 2009 - गाय - 180 - 35 भैंस - 154 बकरी -445 सूअर - 68 2010 -- गाय - 43 - 48 (जनवरी/फरवरी) हिरण का सींग - 6 हिरण की खाल - 1 भैंस - 116

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  • Web Title: बिहार के पशु की विदेशों में सप्लाई हिरण की सींग से