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देश की सनातन संस्कृति पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ: प्रेमभूषण महाराज

पटना (हि.प्र.)। श्रीराम कथा के तीसरे दिन रामकथा मर्मज्ञ प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। धन्य वह सनातन संस्कृति जिसने सृष्टि के स्वामी को अपनी सोच के अनुरुप ढाल लिया है। धन्य है वह मनीषा जिसने निराकार को साकार और निर्गुण को सगुण बना दिया। यह दिव्य उपलब्धि केवल आर्यावर्त ने ही पाई है। यद्यपि महापुरुष सर्वत्र हुए लेकिन भारत में एक से बढ़कर एक साधु-संत पैदा लिए। उन्होंने कहा कि मां-बाप को बाल्यकाल से ही अपने बच्चों में संस्कार डालना चाहिए। गर्भाधान संस्कार के समय से ही मां-बाप को भजन-कीर्तन में मन रमना चाहिए। कथा के दो पक्ष होते हैं ज्ञान पक्ष व भक्ति पक्ष। ज्ञान पक्ष में बुद्धि व तर्क की आवश्यकता है और भक्ति पक्ष में भाव की अनिवार्यता है। दूसरे को देखकर ईष्र्या में कदापि नहीं जलना चाहिए। जो हमें मिला है वही श्रेष्ठ है। रामजन्मोत्सव की चर्चा करते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म से घर-घर में हर्ष हो गया। सभी लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता छा गई। इस कौतुक को देखकर सूर्यदेव भी अपनी गतिविधि भूल गए। एक माह तक कैसे बीता यह कोई नहीं जान सका, मानो अयोध्या में खुशियां ही खुशियां हैं।

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