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सर्विलांस के जरिये अपराधियों की टोह शातिरों की सूची बना

नीतीश कुमार सोनी / वरीय संवाददातापटना। बदले तेवर के साथ अब पटना रेल पुलिस भी अपनी कूवत के साथ टेक्नोलॉजी की बदौलत अपराधियों की लगाम कसने में लग गई है। नई रणनीति पर अमल हो रहा है। खुफिया व अन्य स्रेतों के अलावा सर्विलांस के जरिये अपराध जगत की हलचल पर रेल पुलिस नजर रख रही है। विशेषकर चिन्हित पेशेवर, चार्जशीटेड और कुख्यातों के अलावा वैसे अपराधियों पर निगाह है जो जेल से जमानत पर छूटे हुए हैं। उनकी संगत-हरकत, कामकाज से लेकर वर्तमान में हो रही अन्य गतिविधियों का सत्यापन किया जा रहा है। ऐसे अपराधियों की खास तौर पर सूची बना कर रेल पुलिस ने अपने जाल फैला दिये हैं ताकि गड़बड़ी होने पर कोई बच न सके। पटना रेल जिला का क्षेत्राधिकार राज्य के अन्य रेल जिलों के मुकाबले बड़ा है। इसके अंतर्गत 10 सिविल जिले के इलाके पड़ते हैं जिनमें 11 रेल पुलिस थाने और 11 पुलिस पोस्ट (पीपी) हैं। बहरहाल लंबे समय से बल का रोना रो रही पटना रेल पुलिस अब संतुष्ट है। फिलहाल स्वीकृत क्षमता 767 की जगह 758 जवान उपलब्ध हैं। इसके अलावा जिला पुलिस के 50 जवान और अफसर के साथ ही सैप के 30 जवान भी अतिरिक्त मिले हैं। सैप दस्ते को विशेष तौर पर छापेमारी में लगाया गया है। इस बाबत रेल एसपी जितेन्द्र राणा ने बताया कि सैप दस्ते के अलावा भी रेल पुलिस ने नशाखुरानी गिरोह से लेकर चोर,जेबकतरों और डकैतों आदि के खिलाफ भी दबिश बढ़ाते हुए विशेष अभियान छेड़ दिया है। रेल पुलिस एडीजी अमरीक सिंह निम्ब्रान और आईजी एसके भारद्वाज भी इसकी मॉनीटरिंग करते हैं। बेहतर परिणाम सामने आये हैं। बीते जनवरी माह में जिले में एक भी डकैती की घटना नहीं हुई जबकि 130 ट्रेनों में रेल पुलिस (जीआरपी) एस्कॉर्ट करती है। एक कथित लूट की घटना हुई जिसमें महज 150 रुपये लूटे जाने की शिकायत मिली थी। पिछले वर्ष 14 लूट और 14 डकैती की घटनाएं हुई थी। बकौल रेल एसपी करीब दो दर्जन अधिकारियों की कमी है जो जल्दी ही पूरी हो जायेगी। ड्यूटी के साथ पुलिसकर्मियों को उचित रेस्ट मिले और काम का दबाव नहीं हो, इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

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