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बहुत किया काम, अब कर रहा हूं आराम : दारा

आरती अग्निहोत्री चंडीगढ़। मैंने जवानी में कड़ी मेहनत कर पहलवानी में मैदान मारे और फिल्मों में परिश्रम किया। अब 82 वर्ष की उम्र में मैं आराम कर रहा हूं। जवानी का भी मैंने भरपूर आनंद लिया और अब इस उम्र में भी जीवन का आनंद उठा रहा हूं। यह कहना है रुस्तमे हिंद दारासिंह का। इन दिनों वे अपने सेक्टर-8 स्थित घर में आए हुए हैं। हिन्दुस्तान से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब उन्होंने अपनी दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। भारी खाने की जगह हलका खाना और कसरत की जगह योग अब वे खुद को फिट रखने के लिए कर रहे हैं। लगती है कल-परसों की बातदारा सिंह ने बताया कि सन 1947 में वे सिंगापुर चले गए थे। पहलवानी का बचपन से ही शौक था। लेकिन घर का खर्च चलाने के चक्कर में पहलवानी छोड़नी पड़ी। सिंगापुर में वहां बसे पंजाबियों ने उनको फिर से पहलवानी अपनाने के लिए प्रेरित किया और उनकी मदद भी की।इस तरह उनका पहलवानी का सफर शुरू हो गया। दारासिंह का कहना है कि उन्हें आज भी उन्हें ये कल-परसों की ही बातें लगती हैं। सिंगापुर के साथ उन्होंने कई देशों में अपनी पहलवानी के जौहर दिखा 1957 में वापस भारत लौट आए। दारा सिंह ने दिल्ली में इंडियन चैंपियनशिपलंदन में वर्ल्ड चैंपियनशिप और फिर मुम्बई में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी जीत हासिल की। 1966 में आखिरी बार लंदन में आयोजित चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। कुश्ती में आया बदलावदारासिंह ने कहा कि उनके जमाने और आज के समय की कुलजीत में दिन रात का अंतर आ गया है। आज डब्ल्यूडब्लयूएफ को पहलवानी का नाम दिया जा रहा है जो गलत है। न कोई नियम, न कोई कानून। यह कौन सी कुश्ती है। पहलवान एक-दूसरे को मारकर और खून बहाकर कुश्ती करते हैं या दुश्मनी निकालते हैं, उनकी तो समझ में कुछ नहीं आता। दारा सिंह ने युवाओं को नसीहत दी की वे केवल चैंपियनशिप जीतने के लिए ही खेलों में भाग न लें। बल्कि उनका उद्देश्य खुद को तंदुरूस्त रखना होना चाहिए। हो गया था चैक बाउंसदारा सिंह का कहना है कि उन्होंने 1961 में फिल्म किंगकॉन्ग में पहली बार हीरो का रोल निभाया। पहले तो उन्हें भी फिल्मों में काम करना बड़ा हास्यास्पद लगता था। पर बाद में सोचा कि बुढापे तक पहलवानी तो की नहीं जा सकती। इसलिए फिल्म रोजी-रोटी चलाने का अच्छा जरिया है। हालांकि फिल्म में काम करने पर उनको मिला पहला चैक बाउंस हो गया था। इसके अलावा हिंदी बोलने में भी उन्हें शुरू में काफी कठिनाई हुई। कोई हीरोइन नहीं थी तैयार दारा सिंह ने बताया कि पहलवान होने के चलते शुरू में उनके साथ कोई भी स्थापित हीरोइन उनके साथ काम करने को तैयार नहीं हुई। फिर मुमताज के साथ जोड़ी बनी। इन्होंने ऋषि कपूर और मुमताज के साथ ही अधिक फिल्मों में काम किया है। इसके अतिरिक्त रामानंद सागर के साथ 59 की उम्र में रामायण और सुपरहिट फिल्म जय बजरंग बली में हनुमान का किरदार अदा किया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में रोमांटिक फिल्मों में पहले काम करना बेहद मुश्किल लगता था। दूध, घी, बादाम और अब दाल फुल्का दारा सिंह ने बताया कि एक समय में ताकत के लिए प्रतिदिन दूध,एक पॉव घी,बादाम, एक मुर्गा और एक मुर्गे के सूप का सेवन प्रतिदिन करते थे। वहीं इन दिनों वे सादा भोजन खाते हैं। बिंदू की कामयाबी से खुशदारा सिंह बिगबॉस-3 में बेटे बिंदू को मिली कामयाबी से बेहद खुश हैं। उनके मुताबिक 84 दिनों के कठिन संघर्ष के बाद उनका बेटा कामयाब हुआ। दारा ने कहा कि उन्होंने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दी है। यह उन्हीं का निर्णय था कि वे फिल्मों में काम करें या कुछ और।

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