DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कुलपति के बाउंसर पर कर्मचारियों का सिक्सर अपनी जगह अड़े हैं

पटना (हि.प्र.)। पटना विश्वविद्यालय के कुलपति के दावों की कर्मचारियों ने हवा निकाल दी है। कर्मचारियों का कहना है कि विवि प्रशासन ने कभी हड़ताल समाप्त कराने के लिए वार्ता की पहल नहीं की। दबाव के बाद एक बार वार्ता हुई भी तो कुलपति ने जिन बिंदुओं पर सहमति जताई, समझौता पत्र में वह मुकर गए। कलमबंद हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील कराने में विवि प्रशासन की भूमिका सबसे अधिक रही है। मांगों पर कुलपति की प्रतिक्रिया के बाद कर्मचारियों ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पटना विवि कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष प्रो. नवल किशोर चौधरी व महासचिव विनोद मिश्र का कहना है कि जब तक हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन को स्थगित करना संभव नहीं है। इस बार कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का निर्णय लिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि विवि प्रशासन को अब सभी मांगों पर विचार करना होगा। हालांकि विवि स्तर पर होने वाली किसी भी वार्ता में कर्मचारी कुलपति व प्रति कुलपति के इस्तीफे की मांग छोड़ने को तैयार हैं। लेकिन, विभिन्न मांगों पर जिस प्रकार से दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं आयी हैं, उससे आसार बेहतर नहीं दिखते।प्रमुख मांगों पर प्रतिक्रियाएं मांग : कुलपति व प्रति कुलपति को पद मुक्त किया जाए और उनके कार्यकाल में आंतरिक स्रेत की राशि के दुरुपयोग की जांच हो।कुलपति : मांग गलत है।कर्मचारी संघ : कुलपति तानाशाह हैं और प्रति कुलपति सरकार परस्त। इन दोनों से कर्मचारियों का विश्वास उठ चुका है। इसलिए उन्हें हटाना ही एकमात्र विकल्प है। विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रेत की राशि का दुरुपयोग हुआ है और उसकी जांच निष्पक्ष एजेंसी से हो।मांग : कुलपति के निजी उपयोग में आंतरिक स्रेत की राशि का उपयोग नहीं किया जाए।कुलपति : कुलपतियों को निजी उपयोग के खर्च के लिए विश्वविद्यालय अधिनियम में ही प्रावधान है।कर्मचारी संघ : अगर कुलपति के गाड़ी, पेट्रोल, फोन, चाय, नाश्ता, मीटिंग व प्राइवेट गार्ड के लिए विवि अधिनियम में प्रावधान है तो कर्मचारियों का वेतन देने का भी प्रावधान उसमें हैं।मांग : शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन विसंगति का निराकरण शीघ्र हो।कुलपति : मामले पर विवि प्रशासन सरकार के संपर्क में है।कर्मचारी संघ : विवि स्तर पर मामले की सुनवाई होनी चाहिए। लंबे समय से कर्मचारी इस मांग पर संघर्ष कर रहे हैं और केवल आश्वासन ही अब तक मिला है।मांग : 50 फीसदी महंगाई भत्ता को मूल वेतन में जोड़कर भुगतान किया जाए।कुलपति : सरकार से अनुमति प्राप्त कर इसके लिए एक कमेटी गठित हुई है। कमेटी इस पर आने वाले खर्च का ब्योरा तैयार कर सरकार को अनुमति के लिए प्रस्ताव सौंपेगी।कर्मचारी : अब तक केवल आश्वासन की चासनी चटाई जा रही है।मांग : षष्टम पुनरीक्षित वेतनमान विवि कर्मियों को लागू किया जाए।कुलपति : विश्वविद्यालय स्तर पर यह मांग पूरी करना असंभव है।कर्मचारी संघ : विवि प्रशासन इस मांग को पूरा कराने के लिए सरकार के समक्ष पहल तो कर सकती है। लेकिन कर्मचारियों के हित में कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।मांग : कर्मचारियों को माह की पहली तारीख को वेतन मिले।कुलपति : कर्मचारियों को हम शीघ्र वेतन उपलब्ध कराएंगे।कर्मचारी संघ : कुलपति कर्मचारियों को भ्रमित कर रहे हैं। अभी तक दिसंबर माह का वेतन जारी नहीं किया जाना विवि प्रशासन की नीयत उजागर करता है।मांग : पूर्व के समझौतों को लागू किया जाए।कुलपति : कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को पूरा किया जा चुका है। इसमें अनुकंपा मामलों का निराकरण, निलंबित कर्मियों की वापसी, प्रमोशन, वर्दी जैसे मामले सुलझाए गए हैं।कर्मचारी संघ : विवि प्रशासन ने अब तक एसीपी का लाभ, फरवरी 1999 से सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास भत्ते का भुगतान जैसे मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रमोशन में गड़बड़ी हुई है। अभी तक निलंबन से वापस आए कर्मियों को सभी सुविधाएं नहीं मिल पायी है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: कुलपति के बाउंसर पर कर्मचारियों का सिक्सर अपनी जगह अड़े हैं