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कर्पूरीग्राम की चूड़ी-लहठी बिकने लगी दरभंगा व मुजफ्फरपुर में

समस्तीपुर(पटना), राजीव गौतमजिले के कर्पूरीग्राम का रामकृष्णपुर गांव आधी आबादी के स्वाबलंबन का नजीर बन चुका है। अहले सुबह से लाह की सोंधी-सोंधी महक यहां की हवा में तैरने लगती है। पश्चिम बंगाल के पुरूलिया -बलरामपुर से कच्चा माल लाकर यहां सुहागिनों के लिए लहठी-चूड़ी बनायी जाती है, जो जिले के बाजारों के अलावे दरभंगा, मुजफ्फरपुर आदि जिलों में जाती है। आज यहां की हर महिलाओं का कारोबार न्यूनतम 50 हजार प्रति माह के आंकड़े को पार कर चुका है। लहठी बना रही नीलम देवी, संगीता देवी, बेबी देवी ने बताया कि पहले वे लोग अमीर बनने का सपना देखती थी। आज यहां की महिलाएं किसी के आगे हाथ नहीं पसारती, वरन दूसरों के काम आती है। रामपरी देवी अपनी बच्चाी सरिता की शादी धूमधाम से करना चाहती है। राधा देवी और नीलम देवी बताती हैं कि पुत्री माला और पूजा को अच्छी शिक्षा देने की उनकी मुरादें पूरी हुई। लाह की चूडियों पर सलमा- सितारा करीने से लगा रही सोमा देवी इस कारोबार से घर बनाकर खुश थीं। कच्चे मकान की परेशानियों से आजिज आ चुकी कई अन्य महिलाओं ने भी घर बनाना शुरू कर दी थी। जामिनी देवी, सुशीला देवी, च्िंाता देवी, मीरा देवी, सावित्री देवी, रीता देवी ,इंदू देवी ने बताया कि यह सब हो सका है समूह बनाकर कारोबार करने से। यहां 50 महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बन चुका है। बैंक ने भी सवा लाख से लेकर दो लाख तक लोन समूहों को उपलब्ध कराया है। कारोबारी महिलाओं ने बताया कि 25 प्रतिशत मुनाफा के इस कारोबार से अब उनकी जिंदगी की गाड़ी चल पड़ी है। अब यहां के बच्चों मजदूरी नहीं वरन स्कूल जाते हैं। गांव के सोन, शिवम, विजय, मीसा आदि ने बापू, न्यूटन और कलाम के बारे में बताते हुए कहा कि वे लोग स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। सरकारी सहायता के बारे में पूछे जाने पर डीडीसी अनिरूद्ध प्रसाद सिंह ने बताया कि समूहों के गठन, प्रशिक्षण, लोन और मार्केटिंग में डीआरडीए सहयोग व मार्गदर्शन करता है। आधी आबादी को प्राथमिकता दी जाती है।

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