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डंडा न हथियार, सामना माफियों से अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी पर

पटना (हि.ब्यू.)। न डंडा न हथियार, काम माफियों को सोंटना। काम अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के स्तर का पर चार चक्का तो दूर साइकिल भी मयस्सर नहीं। गलती से साहस करके माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कर दी तो खुद पुलिस केस के फंसने की आशंका। आखिर कैसे हो काम। रविवार को पूरे राज्य के रेंजर (वन क्षेत्र पदाधिकारी) पटना में जुटे और कहा कि रोहतास, गया, रजौली, जमालपुर आदि क्षेत्र में पत्थर माफियों का इतना दबदबा है कि अब काम करना मुश्किल हो गया है। अब भी सरकार अगर हथियार मुहैया नहीं कराती है दुर्गम क्षेत्रों में वन संसाधनों की रक्षा करना असंभव है। बिहार राज्य वन क्षेत्रीय पदाधिकारी सेवा संघ की राज्यस्तरीय बैठक में आये दिन रेंजरों पर हो रहे हमलों के प्रति क्षोभ प्रकट किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा ने कहा कि निहत्थे रेंजरों द्वारा अब पत्थर माफियों पर अंकुश लगाना संभव नहीं है। इसी ताकतवर पत्थर माफिया की लॉबी ने रोहतास में पदस्थापित जाबांज डीएफओ संजय सिंह को मौत के घाट उतरवा दिया था। प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद ने कहा कि रेंजरों के साथ सरकार दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है। झारखंड सरकार ने रेंजरों को 6500-10500 का वेतनमान देना शुरू कर दिया है। पर यहां के रेंजरों को अब भी 5500-9000 का वेतनमान मिल रहा है। रेंजर अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी हैं पर न तो उन्हें वाहन है और न हथियार है। ऐसी परिस्थिति है वर्तमान परिवेश में वन्य प्राणी और वन संसाधनों की रक्षा करना कठिन हो गया है। सरकार चाहती है कि प्रदेश का वन संसाधन सुरक्षित रहे तो उसे रेंजरों को 6500-10500 का वेतनमान, वाहन, वॉकी-टॉकी और हथियार देना होगा। बैठक मे संघ के महामंत्री शशिभूषण झा, अवधेश प्रसाद, सदन कुमार, शशि प्रकाश, अखिलेश प्रसाद, गोपाल मिश्रा, बीबी पाल, विद्यापति सिंह, आरके सिन्हा, सतुंजय कुमार समेत कई रेंजरों ने एक-एक कर समस्याएं गिनाईं।

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  • Web Title: डंडा न हथियार, सामना माफियों से अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी पर