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महीनेभर से बंद है राजगीर का रोपवे, निराश लौट रहे

कार्यालय संवाददातापटना।सत्तर के दशक की सुपरहिट फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ में जिस रोपवे पर देवानन्द व हेमा मालिनी ने अपने लटके-झटके दिखाए थे वह महीनेभर से बंद पड़ा है। यह रोपवे प्रमुख बौद्ध स्थल राजगीर में स्थित है। पर्यटन विकास निगम के अंतर्गत संचालित हो रहे इस रोपवे पर हर रोज अमूमन दो हजार पर्यटक चढ़कर विश्व शांति स्तूप के दर्शन को जाते हैं। रोपवे के जरिए कुर्सी पर बैठकर पर्यटक 1200 मीटर की दूरी तय करते हैं। करीब 7 मिनट जाने में व साढ़े सात मिनट लौटने में लगते हैं। लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में इसकी हालत काफी पहले से पतली है। गत 6 फरवरी से यह बंद पड़ा है। उसी दिन से नालंदा में इंटरनेशनल बौद्ध कान्क्लेव शुरू हुआ था। दो दिनों तक कान्क्लेव चला जिसमें तीन सौ विदेशी पर्यटक शरीक हुए पर रोपवे बंद रहने से उन्हें वहां जाकर निराश लौटना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक जनवरी माह में ही मेंटेनेंस के दौरान ही कई जगहों पर रोप के जर्जर होने की बात उजागर हुई थी। पर्यटन निगम के सूत्रों के मुताबिक रोप चार जगहों पर कट गया है। इससे इसमें ऐंठन आ गयी है। इसी के सहारे ट्रॉली पर ग्रिप बनी रहती है व कुर्सी रोप के सहारे भागता है। लेकिन रोप के कट जाने से ग्रिप बेकार हो गया है जिससे बड़े हादसे की आशंका बन गयी। यानी रोप से लटका चेयर कभी भी नीचे खाइयों में गिर सकता था। तत्काल निगम के अधिकारियों ने इसे बंद करने का फैसला लिया ताकि कोई हादसा न हो। इधर इसकी मरम्मत को लेकर संबंधित कंपनी राइट्स के अधिकारियों की दो दिन की बैठक हुई। बैठक के बाद विभाग के पास रिपोर्ट भेजी गयी है। निगम के अधिकारियों के मुताबिक इसके बनने में अभी 25 से 30 दिन लगेंगे। यानी एक महीने और यह बंद रहेगा। इस वजह से दो महीने में निगम को करीब सवा लाख रुपए का नुकसान होगा व पर्यटकों के बीच गुडविल मारी जा रही सो अलग। निगम के अधिकारी चिंतित हैं कि कहीं 15 अप्रैल तक यह नहीं बना तो काफी नुकसान होगा। यहां उस वक्त मलमास मेला लगता है। इसमें 70 हजार पर्यटक आते हैं।

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