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अगजा का बहुत महत्व है, नए फसल व चना चढ़ाने

िवनय कुमार झापटनाहोिलका दाहे पूर्व वायो राजा प्रजा सुखम/ अिग्न कोणे अिग्न भयम/ दिक्षण नैरत्येयोर दुिर्वक्षम पिश्चमे वृिष्ट/ उत्तरेसुिर्वक्षम इशाणे प्रजा सुखम िनर्बात समयो राज्यों हािनकरैित..भक्त प्रह्लाद व होिलका की कहानी सब जानते हैं। होली से एक िदन पहले होिलका दहन की परंपरा सनातन से चली आ रही है। ज्योितषों व पिंडतों के मुतािबक होिलका दहन का हमारे जीवन पर बहुत खास महत्व है। इसके आधार पर पिंडत हमें सालभर का लेखा-जोखा बता देते हैं। होिलका दहन के दौरान अगजा की िविधवत पूजा-अर्चना भी की जाती है। रोली, अक्षत के साथ चना व नए फसल चढ़ाए जाते है। अगजा की पांच बार पिरक्रमा की जाती है। इससे घर में सुख- समृिद्ध आती है। ज्योितषी िवनोद झा वैिदक के मुतािबक होिलका दहन की रात के बाद अहले सुबह उस स्थल परजिंस िदशा की ओर हवा बहती है उसके िहसाब से फल की प्रािप्त होती है। अगर हवा पूर्व की ओर बह रही है तो राजा व प्रजा दोनों सुखी होते हैं।अिग्न कोण यानी पूर्व दिक्षण की िदशा में हवा बहे तो अिग् का डर रहता है। दिक्षण िदशा की ओर हवा बह रही है तो अकाल पडऩे की संभावना होती है। पिश्चम की िदशा में हवा बहने पर बािरश की संभावना रहतीहै। वायुवृिद्ध यानी उत्तरर-पिश्चम िदशा में हवा बहे तो वायु में वृिद्ध होती है। उत्तर िदशा में हवा बहे तो अच्छा समय होगा। इशाने कोणे यानी पूर्व-उत्तर िदशा में हवा बहे तो प्रजा सुखम अर्थात प्रजा सुखी होता है। अगर बिढय़ा से होिलका दहन न हो राज्य की हािन होती है। ---------------------------------------------------------------अगजा के समय िविभन्न रािशयों का फल;मेष: िवत्त की प्रािप्त का समयवृष: कर्म की िसिद्ध होगीिमथुन: पाप की तरफ वृिद्धकर्क: रोग की संभावनाकन्या : सुख की प्रािप्त व शत्रु का नाशतुला: अर्थनाशवृिश्चक : रोग की संभावनाधनु: सुख व लक्ष्मी की प्रािप्तमकर: डर व हािनकुंभ : स्थान हािन व यात्राा का योगमीन: द्रव्य का क्षय, कष्ट व भय--------------------------------------------------------------------

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  • Web Title: अगजा का बहुत महत्व है, नए फसल व चना चढ़ाने