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चोरी के एनएससी और केवीपी पर लिया गया बैंकों से

िवनायक िवजेतापटना। पटना जंक्शन के यार्ड में खड़ी रेल वैगन से करोड़ाें रुपये मूल्य के चोरी गए एनएससी-केवीपी का प्रयोग जहां अरबों रुपयों के ठेके लेने में हुआ वहीं ऐसे फर्जी एनएससी और केवीपी का प्रयोग िविभन्न बैंकों से लोन लेने में भी किया गया।अबतक की जांच में यह बात सामने आयी है कि चोरी गए 19 ईई िसरीज के एनएससी में से सात लाख नब्बे हजार रुपये के एनएससी का प्रयोग यूिनयन बैंक ऑफ इिंडया, गोलमुरी जमशेदपुर ब्रांच से लाखों रुपयों का कर्ज लेन के िलए किया गया। आरोिपतों ने चोरी के एनएससी को जमानत प्रितभूित के रूप में बैंक में जमा कर कर्ज िलया था। इस संदर्भ में िविभन्न धाराओं के तहत गोलमुरी थाने में प्राथिमकी दर्ज है। इसी तरह 19 ईई िसरीज के एनएससी तथा 46 सीसी िसरीज के किसान िवकास पत्र को पंजाब एण्ड िसंध बैंक, धनबाद शाखा में िगरवी रखकर कर्ज िलए गए थेजिंसके संदर्भ में सीबीआई धनबाद कांड संख्या-आरसी 2ए /01 (डी) दर्ज किया गया है। इससे संबिंधत एक मामला पटना के जक्कनपुर थाने में भी दर्ज है। थाने में दर्ज िशकायत के अनुसार इस कांड में चोरी गए एनएससी को िगरवी रखकर स्टेट बैंक आफ इिंडया की मीठापुर शाखा से लोन िलया गया। इसी तरह इस िसरीज के चोरी गए एनएससी का प्रयोग करके भारतीय स्टेट बैंक, तारापुर, पंजाब नेशनल बैंक, बरारी एवं इसी बैंक की बाजार शाखा में िगरवी रखकर लगभग पचास लाख रुपये लोन िलए गए। इस मामले में भागलपुर कोतवाली थाना कांड संख्या 737/02 एवं भागलपुर गंगाब्रीज थाना कांड संख्या 760/02 अंकित किया गया। िनयमत: किसी भी बैंक को प्रितभूित के रूप में जमा की जा रही जमानत की छानबीन के बाद ही कर्ज देने का प्रावधान है पर बैंको ने उन प्रितभूितयों का िबना सत्यापन कराए कैसे लोन िनर्गत कर िदया यह भी सीबीआई की जांच के दायरे में है। िवश्वस्त सूत्रों के अनुसार और कई अन्य बैंकों द्वारा भी चोरी के एनएससी और केवीपी को प्रितभूित के रूप में जमा कर कर्ज के रूप में भारी-भरकम रािश देने की आशंका है। सूत्र बताते हैं कि इस आशंका की भी छानबीन हो रही है। सूत्रों के अनुसार करीब अस्सी करोड़ रुपये मूल्य के एनएससी और केवीपी चोरी मामले में आरपीएफ के तत्कालीन इंस्पेक्टर लक्ष्मण दीिक्षत की भूिमका की जांच भी सीबीआई कर रही है। बताया जाता है कि सीआर-64037 नंबर केजिंस वैगन को 20 जनवरी 1998 से 19 फरवरी 1998 के बीच छह बार तोड़ा और िफर से सील किया गया उसकी सुरक्षा कीजिंम्मेवारी आरपीएफ पर ही थी। सबसे सनसनीखेज तो यह है कि 27 िदसम्बर 1997 को नािसक से आएजिंस वैगन से कुछ पार्सल पटना में अनलोड कर उसे तुरंत ही कोलकाता रवाना कर िदया जाना था उस वैगन को पटना रेलवे यार्ड में दो माह तक खड़ा रखा गया, जो इस मामले में गंभीर और उच्चस्तरीय सािजश की ओर इिंगत करता है।

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  • Web Title: चोरी के एनएससी और केवीपी पर लिया गया बैंकों से