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सिंधी कवि सम्मेलन में दिखे विविध रंग होली मिलन का आयोजन

िहन्दुस्तान संवाद लखनऊिसंधी भाषा के किव सम्मेलन में होली, प्रेम और देशभिक्त के िविवध रंग देखने को िमले। उप्र िसन्धी अकादमी की ओर से रिववार को होली िमलन एवं िसंधी किव सम्मेलन का आयोजन आलमबाग नहिरया िस्थत िशवशािन्त आश्रम में किया गया। किव सम्मेलन की शुरुआत भगवान झूले लाल की स्तुित से हुई। मुम्बई की नीलू मेघ ने ‘कीन ईंदो..’ िसंधी किवता में नाियका से कहा गया कि उसका िहतैषी अब नहीं लौटेगा। इसिलए खुद को संभालो। भोपाल के खीमन मूलाणी ने ‘गािल्ह में कुछ न हो’ किवता में बताया गया कि मामूली बात को किस तरह ितल का ताड़ बना िदया जाता है। फैजाबाद के ज्ञान प्रकाश टेकचंदानी ने ‘मुिंहंजे मुल्क’ में होली की सार्थकता को पिरभािषत किया।आगरा के मोहन मलंग ने ‘िसंधु जी आिद कराएंथीं’ में िसंधी मीठी बोली का बखान किया। भोपाल के भगवान बावानी ने ‘माँ दिहंजी आत्मा’ काव्य का पाठ किया। इसके अलावा अशोक शर्मा, प्रकाश गोधवानी, संतलाल, राजकुमारी, नंद लाल दयानी, अर्जुन चावला ने भी काव्य पाठ किया। समारोह में सतीश अडवानी, मुरलीधर आहूजा, राज कुमार भागवानी, पार्षद नानक चंद लखमानी मौजूद थे। इसकी अध्यक्षता प्रमुख सिचव अशोक घोष ने की। िशवशािन्त आश्रम के महंत साईं मोहन लाल समारोह के मुख्य अितिथ थे।

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