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बार काउंसिल का प्रस्ताव बढ़ाएगा पेशे की गरिमा

वकालत के लिए प्रवेश परीक्षा का वकीलों ने समर्थन कियालखनऊ। एलएलबी की डिग्री अब वकालत की गारंटी नहीं होगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ऐसा एक प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट को भी भेजा है। शहर के अधिवक्ताओं ने इसका समर्थन किया है। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत के दौरान उन्होंने इससे उनके पेशे की गरिमा बढ़ने जैसी बात कही। पारुल कांत ने कहा कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस प्रस्ताव का समर्थन करती हैं। उनका मानना है कि इसके पास होने के बाद वकालत के व्यवसाय को बहुत लाभ मिलेगा। गुणवत्ता बढ़ेगी और अच्छे लोग सामने आएँगे। अमरनाथ सिंह ने कहा कि वकालत के लिए प्रवेश परीक्षा का प्रावधान होने पर जिनको विषय पर पकड़ होगी वहीं वकालत में आएँगे। प्रैक्टिस करने वाले भी अच्छे अधिवक्ता होंगे जो अपने क्लाइंट को अच्छा सुझाव दे पाएँगे। राव नरेन्द्र सिंह और रमाकांत जायसवाल ने कहा कि इस प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट को मान लेना चाहिए। वकालत को हीन भावना से देखने वालों में कमी आएगी। कुछ लोग वकालत को अधिवक्ता का लेबल लगाने के लिए करते हैं उन पर भी लगाम लग सकेगी। यज्ञमणि दीक्षित के मुताबिक बार काउंसिल ऑफ इंडिया का प्रस्ताव सही नहीं है। उनका कहना है कि अब वकालत की पढ़ाई करने वाले को वकालत करने के लिए प्रवेश परीक्षा देनी पड़ेगी। संजीव गर्ग ने कहा कि वर्तमान परिस्तिथियों के लिए इस प्रस्ताव की आवश्यकता है। क्योंकि कुछ लोग वकालत का अमलीजामा पहनकर नेतागिरी करते हैं तो कुछ प्रैक्टिस करने के बजाय विवि का माहौल बनाने में लगे हैं। विजय कुमार कनौजिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस प्रस्ताव को मान लेना चाहिए क्योंकि यह वकालत की गरिमा के लिए बहुत जरूरी है। मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि अधिवक्ता ट्रेनी की व्यवस्था फिर से लागू होनी चाहिए। सेल्फ प्रोटेक्शन के लिए वकालत करने वालों पर लगाम लग सकेगी। प्रस्तुति: पल्लव शर्मा

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  • Web Title: बार काउंसिल का प्रस्ताव बढ़ाएगा पेशे की गरिमा