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पेसू को फ्रेंचाइजी पर देने का फैसला: बिजली मिस्त्री से

कार्यालय संवाददातापटना।पेसू को फ्रेंचाइजी पर देने यानी निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर इंजीनियर से लेकर बिजली मिस्त्री तक गरम हैं। पेसूकर्मियों को अपनी नौकरी की चिंता सताने लगी है। वहीं आम उपभोक्ताओं में भी बैचेनी है कि कहीं बिजली बिल न बढ़ जाए। बिजली बोर्ड के इंजीनियरों के संगठन पेसा सहित कामगारों के यूनियनों तक ने इस फैसले को लेकर सड़क पर लड़ाई लड़ने का मूड बना लिया है। इनका कहना है कि बोर्ड प्रति यूनिट बिजली खरीद रहा है 2 रुपये 75 पैसे से 3 रुपए के बीच जबकि निजी कंपनी बोर्ड को महज 1.80 रुपए प्रति यूनिट ही देगा। अगले दस सालों में बिजली की खरीद 6 से 8 रुपए तक हो जाएगी जबकि निजी कंपनी बोर्ड को 3 रुपए ही देगा। यानी दो से ढाई गुना घाटा होगा बोर्ड को। पेसा के महासचिव अरविंद प्रसाद के अनुसार यह फैसला लागू हुआ तो बोर्ड के अभियंता आंदोलन को मजबूर होंगे। उनके अनुसार इसके पहले गुलजारबाग को निजी हाथों में सौंपने का फैसला निरस्त करना पड़ा था। इस बाबत कानूनी राय भी यह थी कि शहरी बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथ में देना विधि-सम्मत नहीं है। पेसा कार्यकारिणी की सीएल प्रकाश की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस फैसले का पुरजोर विरोध किया गया था। अभियंता की राय थी कि वे बोर्ड के हाथों ठगे महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार पेसू द्वारा हर महीने सरकारी विपत्रों का मासिक भुगतान नहीं होने के बावजूद 45 करोड़ रुपए तक की वसूली कर ली जाती है। दूसरी ओर बिहार-झारखंड राज्य विद्युत परिषद फील्ड कामगार यूनियन के महासचिव अमरेन्द्र प्रसाद मिश्र के अनुसार इस फैसले के खिलाफ 12 अप्रैल को सारे कामगार राज्यस्तरीय प्रदर्शन करेंगे व फिर आगे के आंदोलन की रणनीति बनायी जाएगी। उनके अनुसार निजी कंपनी की इच्छा पर होगी कि वे पेसू के सारे कामगार को रखें या नहीं। वे अपनी मर्जी से लोगों को रखेंगे।

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