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पूर्व बिहार के 15 जिलों में दस करोडम्पति भी नहीं

भागलपुर, रवीन्द्र नाथ तिवारीभागलपुर। पूर्व बिहार और कोसी में 1 लाख 32 हजार आयकरदाताओं में 10 लोग भी करोडम्पति नहीं हैं। आयकर विभाग के अनुसार इस जोन के 15 जिलों में करोडम्पतियों का टोटा है। आयकर आयुक्त प्रशांत भूषण का मानना है कि वैसे तो विभिन्न मुहल्लों में दसियों करोडम्पति नजर आते हैं लेकिन ‘डिस्ट्रिव्यूशन ऑफ इनकम’ के जरिए आयकर विभाग से ज्यादातर कमाई छिपा रहे हैं। आय को कई परिजनों और कर्मचारियों के नाम से बांटकर आयकर विभाग के समक्ष दर्शाया जा रहा है ताकि कारोबार और टैक्स का अंश कम दिखे। ऐसे 150 मामलों को जांच के दायरे में लिया गया है जिसमें आय का एक ही स्रेत है लेकिन कई नामों और स्रेत से रिटर्न दाखिल किए जा रहे हैं। भागलपुर आयुक्त कार्यालय क्षेत्र अंतर्गत कोसी, मुंगेर और भागलपुर प्रमंडलों में आयकर देने वालों में करीब 80 हजार नौकरीपेशा और 52 हजार कारोबारी हैं। नियमित आयकर जमा करने के आधार पर कारोबार का आकलन करने पर इस रेंज में करोडम्पति मुश्किल से मिल पाएंगे। आयकर सूत्रों के अनुसार पूरे रेंज में 50 लाख टैक्स जमा करने वाले मुश्किल से चार-पांच लोग हैं। भागलपुर में सबसे ज्यादा नियमित कर एक चिकित्सक जमा करते हैं। बीते साल उन्होंने 20 लाख रुपए कर दिया। 5 लाख रुपए से ऊपर कर जमा करने वाले मुश्किल से 100 लोग हैं। जबकि एक से 5 लाख रुपए के बीच कर देने वालों की संख्या 100 से ऊपर है। ज्यादातर कर हजार में जमा हो रहा है। ज्यादातर कारोबारी लखपति हैं। चाहे वह व्यापारी हों, नर्सिंग होम, स्कूल या कोचिंग संचालक। आयकर आयुक्त के अनुसार करोडमें के कारोबार को पत्नी,बच्चों और भाई यहां तक कि नौकरों के नाम से अलग-अलग दिखाकर रिटर्न दाखिल किया जा रहा है। इससे करोडमें का कारोबार लाखों में और लाखों का टैक्स हजारों में हो जाता है। कई लोगों ने अपने नवजात शिशुओं के नाम पर भी कारोबार दिखा रखा है। शहर के एक प्रमुख मिठाई दुकान के सर्वे में सालाना एक करोडम् रुपए से अधिक के कारोबार की जानकारी मिली, लेकिन वह परिवार के चार सदस्यों के नाम से अलग-अलग राशि का कारोबार आयकर विभाग को दिखा रहे थे। आयकर विभाग ने चारों सदस्यों के फाइल को बंद करते हुए सबको एक ही कारोबार माना और कारोबारी से इकठ्ठे टैक्स वसूला। पिछले एक साल में आयकर विभाग ने करीब 50 मामलों की जांच के बाद ऐसी कई फाइलों को बंद कर एक में मिल दिया है। पूर्व बिहार और कोसी में अभी करीब आयकर विभाग 400 ऐसे मामलों को खंगाल रहा है। आयकर उपायुक्त मौर्य प्रताप ने बताया कि एक ही ट्रस्ट से भागलपुर,बांका और देवघर में इंटरस्तरीय स्कूल चलाया जा रहा था लेकिन तीनों का आयकर रिटर्न अलग-अलग भरा जा रहा था और उसपर भी तीनों को घाटे में दिखाया जा रहा था। श्री प्रताप के अनुसार आयकर आयुक्त के निर्देश पर ऐसे मामलों की छानबीन शुरू कर दी गई है।

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