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ये हैं वाहनों के भावी ईंधन और उनके रिपोर्ट कार्ड

बायो-डीजल
यह ईंधन जानवरों की वसा और पेड़-पौधों से निकलने वाले पदार्थो से बनाया जाता है। पौधों में भी सूरजमुखी, सोयाबीन, जटरोपा, राई, सरसों आदि इस दिशा में काम आते हैं। बायो-डीजल चूंकि प्राकृतिक तरीके से खत्म हो जाता है, लेकिन वातावरण में छोड़े जाने पर जीव-जंतुओं के श्वासतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके बावजूद, तेजी से समाप्ति की ओर बढ़ रहे जीवाश्म ईंधन (मिनरल ऑयल) का उचित विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि यह ऊर्जा का रिन्यूएबल स्रोत है।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए हजारों एकड़ व्यर्थ पड़ी जमीन काम में लाई जा सकती है। वहां इन पौधों की खेती कर यह ईंधन प्राप्त किया जा सकता है। और कहना न होगा कि रोजगार के क्षेत्र में इसका कितना फायदा होगा। बायो डीजल का उत्पादन बिना किसी बाहरी सहायता के प्रादेशिक स्तर पर किया जा सकता है। यह हाई ऑक्टेन ईंधन है जो इंजिन की क्षमता बढ़ाता भी है।

एक ल्युब्रिकेंट के तौर पर भी बायो डीजल अन्य पैट्रोल और डीजल से बेहतर है और इंजिन का जीवनकाल भी इससे बढ़ता है। एक बेहतर इंजिन ध्वनि प्रदूषण भी कम फैलाता है। अन्य ईंधनों की तरह हालांकि बायोमास से भी कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में फैलती है। लेकिन पूरी तरह जलने के कारण यह ईंधन कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सजर्न वातावरण में कम करता है। यह पृथ्वी की ओजोन परत को 50 प्रतिशत कम नुकसान पहुंचता है। यह अधजले हाइड्रोकार्बनों को कम करता है।

लाभ : आम पेट्रोल, डीजल और गैसोलीन विभिन्न हाइड्रोकार्बन चेनों से बने उत्पाद होते हैं। इनमें मौजूद बैनजीन और साइलिन बेहद विषाक्त पदार्थ होते हैं और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इनके विपरीत बायो डीजल हमें ईको-फ्रेंडली वातावरण उपलब्ध करा सकता है। बायो डीजल से हमारा देश ओपेक देशों से लाखों टन कच्च तेल आयात करने से भी बच सकता है जो  अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होगा।

इथेनॉल
इथेनॉल (इथाइल एल्कोहल) को ग्रेन एल्कोहल के नाम से भी जाना जाता है। यह वही एल्कोहल है जो पेय पदार्थो में मौजूद होता है। सामान्य शब्दों में बायोइथेनॉल, जैविक पदार्थो से बनाया जाता है। चूंकि पेड़-पौधे, घास, मक्का, गेहूं आदि जैव पदार्थो का विकास सूर्य की रोशनी और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर आधारित है, इसलिए इसे  रिन्यूएबल ईंधन कहा जाता है। यह तरल, स्वच्छ, रंगहीन,  आसानी से नष्ट होने वाला है। इसमें टॉक्सिक की मात्र बेहद कम होती है।

लाभ: बायोइथेनॉल लो-ब्लैंड वाले मौजूदा गैस इंजनों के पूरी तरह अनुरूप है। यह उच्च ऑक्टेन ईंधन है, जिसमें से उत्सर्जन कम होता है।

नुकसान : एल्यूमीनियम जैसी धातुओं को नुकसान पहुंचा सकता है। बायोइथेनॉल बनाने के लिए आवश्यक फसलों की उपज के लिए बड़े पैमाने पर कृषियोग्य भूमि और उत्पादन के लिए बड़े स्तर पर ऊर्जा की जरूरत होगी। यह महंगा ईंधन होगा।

भविष्य: बायोइथेनॉल का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह किस तरह के जैविक पदार्थो से बनाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इसका भविष्य सेल्यूलॉसिक इथेनॉल जो कि मक्का और घास से बनता है में निहित होगा।

सिंथैटिक ईंधन
सिंथैटिक ईंधन से आशय ऐसे तरल ईंधन से है जो खास फीडस्टॉक (जैविक पदार्थो) जैसे प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्य जैविकों से बनता है। इसका उत्पादन दो रासायनिक प्रक्रियाओं के तालमेल से होता है। सिंथैटिक ईंधनों के तीन प्रकार होते हैं, गैस से तरल, कोयले से तरल और जैविक पदार्थो से तरल में परिवर्तन।

लाभ : सिंथेटिक ईंधन को मौजूदा गैस/डीजल वाहनों में बिना इंजिन में परिवर्तन किए इस्तेमाल किया जा सकता है। अन्य ईंधनों की तुलना में इससे कम नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बनडाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।

नुकसान : वैकल्पिक ईधनों का मुख्य उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर अपनी निर्भरता को कम करता है, जो कि सिंथैटिक ईंधनों से संभव नहीं है।

भविष्य : ये गैस/डीजल से आगे हाइड्रोजन और प्योर इलेक्ट्रिक पॉवर की ओर बढ़ाते हैं, इससे अधिक की उम्मीद इससे संभव नहीं है।

अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल (यूएलएसडी)
यह परंपरागत ईधन की तरह ही है, जिसमें डीजल की तुलना में कम सल्फर होता है। अमेरिका की एन्वायरनमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी यूएलएसडी को तभी वैकल्पिक ईंधनों की श्रेणी में रखती है यदि डीजल का निर्माण रिन्यूएबल स्रोतों से हो, तेल आधारित नहीं। यूएलएसडी कार्बन उत्सर्जन कम नहीं करता, दूसरे तत्वों को अवश्य कम करता है।

लाभ : यूएलएसडी और डीजल तकनीक को स्वच्छ डीजल कहा जाता है। इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड, पीएम और सल्फर की बहुत अधिक मात्र के उत्सर्जन को रोकने में मदद मिलती है।

नुकसान : पुराने डीजल वाहनों में इसके इस्तेमाल से तकनीकी समस्या हो सकती है। चिकनाई तत्व कम होने के कारण यह नुकसान पहुंचा सकता है।

भविष्य: यूएलएसडी तेजी से व्यापक हो रहा उद्योग है और वर्तमान में इसे तेजी से उभरते अच्छे ईंधनों में गिना जाता है।

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