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बंदी से जबरन काम कराया तो होगी जेल बंदियों की अपनी

सुशील सिंह लखनऊबंदी से जेल में जबरन काम कराने वाले अधिकारियों की अब खर नहीं। बंदी की शिकायत पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। आरोप साबित होने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। निजी व घरेलू नौकर की तरह बंदी से काम लेने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने मंगलवार को बंदी ‘पारिश्रमिक सहायक नियम 2010’ का सर्कुलर जारी किया। कार्य करने वाले प्रत्येक बंदी का ब्योरा दर्ज होगा। हर बंदी की पारिश्रमिक पासबुक बनेगी। परिक्षेत्र के डीआईजी और अन्य अधिकारी निरीक्षण के दौरान बंदियों से जबरन काम लेने एवं उनके उत्पीड़न पर नजर रखेंगे। आईजी जेल सुलखान सिंह के मुताबिक कड़े कारावास की सजा भुगत रहे बंदी से काम कराने की व्यवस्था है। इसके अलावा साधारण कारावास की सजा वाले, विचाराधीन व सिविल बंदियों से उनकी सहमति के बिना काम नहीं कराया जा सकता। डीआईजी व वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान बंदियों से जबरदस्ती काम कराने की शिकायत मिलने पर जेलर, प्रभारी डिप्टी जेलर व अन्य अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ मुकदमा भी दर्ज होगा। वहीं, महिला और किशोर बंदियों से बैरक के अहाते में ही काम कराए जाने का प्रावधान है।जेल में बंदियों से कराए जाने वाले कामजेल में बंद सिद्धदोष और विचाराधीन बंदियों से भोजन पकाने, सफाई, कृषि, बागवानी, राजगीर, बढ़ई, प्लम्बर, लुहार, बढ़ई, बिजली का काम, चक्की का संचालन बंदी शिक्षा, नर्सिग सहायक व अर्दली, गोदामों के रखरखाव, उद्योग समेत अन्य प्रबंध एवं सुरक्षा व्यवस्था आदि कामों में श्रम कराए जाने की व्यवस्था है।ये हैं मजदूरी की दरेंप्रत्येक बंदी को काम के हिसाब से मजदूरी की तीन दरें निर्धारित की गई हैं। इसमें अकुशल को 10 रुपए, अर्धकुशल को 13 रुपए और कुशल को 18 रुपए दिए जाने का प्रावधान है।ं

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