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माओवादियों ने बच्चों से माफी मांगी स्कूलों को उड़ाने के लिए

कमलेशपटना। माओवादियों ने उन बच्चों से माफी मांगी है जिनके स्कूल उन्होंने उड़ाये हैं। वैसे उन्होंने यह भी कहा है कि बच्चों के जंगल,जमीन और पहाड़ाें को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी था। यह संदेश पहुंचाने के लिए भाकपा माओवादी की सोन-गंगा-विंध्याचल जोनल कमेटी ने बच्चों के नाम एक पत्र लिखा है। इस पत्र को उन जिलों में बच्चों के बीच जमकर बांटा जा रहा है जहां माओवादियों का काम-काज है।पत्र में उन्होंने कहा है कि हमारी पार्टी ने बच्चों के विद्यालय भवन को क्षतिग्रस्त किया है और इसके कारण उनकी पढ़ाई बाधित हुई है। इसके लिए खेद जताते हुए कहा गया है कि वे ऐसा बाध्य होकर कर रहे हैं। पुलिस जहां भी जाती है विद्यालय भवनों पर ही कब्जा करती है और लोगों पर जुल्म करती है। उन्होंने बच्चों को बताया है कि पूरे देश में मनमोहन-चिदम्बरम की सरकार ने जंगलों और पहाड़ाें को लुटेरी विदेशी कंपनियों के हाथों बेच दिया है। माओवादी इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बच्चों से पूछा है कि वे ही बतायें कि देश के लिए खतरा कौन है- देश को लूटने वाले या देश की लूट का विरोध करने वाले। उन्होंने दावा किया है कि वे अपने देश को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और असली देशभक्त हैं। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि बच्चों के आदिवासी भाइयों को मारने के लिए कुचलने के लिए भारत सरकार ने लाखों खूनी सैनिकों को भेजा है। सरकार बच्चों के जंगलों और पहाड़ाें को छीन लेना चाहती है और इसके लिए तमाम स्कूलों और सरकारी भवनों को सैनिक छावनी में बदल देने की योजना है। उन्होंने बच्चों से पूछा है कि क्या वे अपनी जंगल, जमीन और पहाड़ाें को लुटेरों के हाथों में जाने देंगे या लुटेरों के खिलाफ चल रही लड़ाई में मदद करेंगे। माओवादियों ने कहा है कि स्कूल और सरकारी गतिविधियों को केन्द्रित कर हत्यारी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसके खिलाफ माओवादी लड़ रहे हैं। उन्होंने इस लड़ाई में बच्चों से मदद मांगी है।

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