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कैमूर फाइनेंस कंपनी को संपत्ति

2-ूंे41कैमूर फाइनेंस कंपनी को संपत्ति बेचने पर रोक लगाईपटना (वि.सं.)। पटना हाईकोर्ट ने कैमूर फाइनेंस कंपनी को अपनी संपत्ति बेचने पर रोक लगाते हुए कंपनी स जवाब-तलब किया है। साथ ही कम्पनी पर नोटिस जारी किया। शुक्रवार को न्यायमूर्ति रमेश कुमार दत्ता की एकलपीठ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। इसके पूर्व आरबीआाई के वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा तथा अधिवक्ता कौशल कुमार झा ने अदालत को बताया कि कम्पनी अपने जमाकर्ताओं को पैस का भुगतान नहीं कर रही है। साथ ही नए लोगों से पैसा जमा करा रही है। उनका कहना था कि कम्पनी अपना सम्पत्ति बेच कर फरार होना चाहती है। अदालत ने कम्पनी को सम्पत्ति बेचने पर पूर्ण रूप से रोक लगाते हुए हाईकोर्ट में हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामल की अगली सुनवाई की तारीख आगामी 6 मई तय की है।सबौर बीडीओ को जीवन निर्वाह भत्ता तीन के भीतर सूद समत दें हाईकोर्ट न मुख्य सचिव को दिया आदेशपटना (वि.सं.)। पटना हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को भागलपुर के सबौर बीडीओ को तीन महीने के भीतर जीवन निर्वाह भत्ता के साथ साथ सूद की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही दोषी पदाधिकारी के पॉकेट से सूद की राशि वसूलने को कहा है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की एकलपीठ ने बीडीओ राम निरंजन चौधरी की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि जीवन निर्वाह भत्ता पर कितनी सूद दी जाएगी इस का फैसला मुख्य सचिव करें। इसके पूर्व आवेदक के वकील दीनू कुमार न अदालत को बताया कि बीडीओ को सेवा से निलंबन कर दिया गया था। निलम्बन आदेश की वैद्यता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद एक माह के भीतर आवेदक के अभ्यावेदन पर विचार करने का आदेश दिया । साथ ही जीवनन निर्वाह भत्ता देने का आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के आदेश कि एक प्रति कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग को दे दी गई। लेकिन अदालती आदेश का पालन किए बगैर निलम्बन को बरकरार रखते हुए जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान नहीं किया गया। राज्य सरकार का बचाव करते हुई हरेन्द्र प्रसाद सिंह ने अदालत को बताया कि विभागीय कार्रवाई समाप्ति के कगार पर है। अदालत ने भी माना कि निलम्बित कर्मचारी को जीवन निर्वाह राशि का भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने सबसे पहले आवेदन को जीवन निर्वाह भत्ता देने का आदेश दिया। वहीं मुख्य सचिव को बनाए जीवन निर्वाह भत्ता के उपर कितना सूद दिया जाएगा। उसका फैसला लेने को कहा है। साथ ही सूद की राशि को दोषी अधिकारी के निजी पॉकेट स वसूलने का आदेश दिया।पूर्व विधायक तारकेश्वर की अर्जी खारिजपटना (वि.सं.)। पटना हाईकोर्ट ने मशरख के पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह को राहत देने से साफ इंकार करत हुए अर्जी को खारिज कर दिया। शुक्रवार को न्यायमूर्ति धरणीधर झा की एकलपीठ ने श्री सिंह की अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। विदित है कि मशरख के वर्तमान विधायक केदार नाथ सिंह से मिल कर वापस घर आते समय रास्ते में सूचक रीतेश कुमार क उपर जानलेवा हमला किया गया था। घटना के बाद बनियापुर थाना में कांड संख्या 36/06 दर्ज करायी गई। इस मामले में छपरा के सीजेएम ने 6 मार्च 2006 को संज्ञान लिया था। संज्ञान आदेश की वैद्यता को हाईकोर्ट में अर्जी दायर की गई। अदालत ने संज्ञान आदेश में किसी प्रकार से हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। इसी बीच आवेदक के वकील एस बी के मंगलम ने अर्जी को वापस लेने का अनुरोध अदालत से किया। अदालत ने श्री मंगलम के अनुरोध को मंजूर करते हुए अर्जी खारिज कर दी।

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