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बिहार में तीन साल से चल रहा अनिवार्य शिक्षा कार्यक्रम

पटना (हि.ब्यू.)। मानव संसाधन विकास विभाग के मंत्री हरिनारायण सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्र सरकार से आगे चल रही है बिहार सरकार। भारत सरकार ने गुरुवार से अनिवार्य शिक्षा कार्यक्रम लांच किया है जबकि बिहार में बिना किसी एक्ट के तीन साल से अनिवार्य शिक्षा कार्यक्रम चल रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि नीतीश शासन में शिक्षा के क्षेत्र में राज्य में व्यापक चेंज आया है। स्कूलों में ढाई गुणा उपस्थिति बढ़ी है। परिभ्रमण, साइकिल, पोशाक, हुनर, मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजनाओं ने इस क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता दिलाई है। गुणात्मक सुधार करके तीन साल में राज्य सरकार ने शिक्षा को सबके लिए अनिवार्य बनाया है। केन्द्र सरकार की पहल का स्वागत है। ठीक है, उनके पह बाद बिहार भी अनिवार्य शिक्षा को और गति देगा। एचआरडी मंत्री ने कहा कि अनिवार्य शिक्षा में केन्द्र और राज्य की लागत का अनुपात 55 : 45 है। इसमें काफी धन की जरूरत है। ककेन्द्र के पास आय के स्त्रोत भी बहुत हैं। इस अनुपात को कम से कम 75:25 होना चाहिए। हालांकि फिर भी सरकार इसे लागू करेगी। अनिवार्य शिक्षा कानून के मुताबिक छात्र शिक्षक अनुपात 30:1 होना चाहिए जबकि बिहार का मान्यता 40:1 की है। फिलहाल हमारे प्राथमिक स्कूलों में यह अुनपात 49:1 का है। यह सवा दो लाख शिक्षकों के नियोजन के बाद हुआ है। पहली अप्रैल से लागू कानून के बाद निजी विद्यालयों में 25 फीसदी गरीब छात्रों के नामांकन पर श्री सिंह ने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार को नियम और उपनियम लागू करना होगा। क्योंकि जो निजी विद्यालय राज्य, सीबीएससी या आईसीएससी बोर्ड से नियोजित हैं उनके यहां तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर 25 फीसदी गरीब बच्चों का नामांकन करा लेगी, पर प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर बहुत सारे ऐसे अच्छे निजी विद्यालय हैं जिनका निबंधन कहीं से नहीं है।

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