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राजद के पास बातों के सिवा कुछ भी नहीं है रंगदारी

पटना। जदयू के विधान पार्षद और प्रवक्त संजय सिंह ने कहा है कि राजद को अब पशुपालकों और फेरीवाले पर टैक्स की याद आ रही है। राजद को बताना चाहिए कि उसके राज में रंगदारी टैक्स के मद में जो वसूली होती थी वह कहां खर्च होता था। मौजूदा राज्य सरकार तो कर से हासिल राशि को विकास पर खर्च करती है। राजद शासनकाल में तो रंगदारों के डर से फेरीवालों ने गलियों में घूमना बंद कर दिया था। अब वे इत्मीनान से अपना कारोबार कर रहे हैं। जनता ने छोड़ दिया तो राजद को सामाजिक समरसता की याद आ रही है। जबकि राजद की पूरी राजनीति की सामाजिक विद्वेष पर टिकी थी। अति पिछड़ाें को छलाजदयू के प्रवक्ता एवं प्रदेश उपाध्यक्ष डा. निहोरा प्रसाद यादव ने कहा कि अति पिछड़ाें के लिए राजद के पास बातों के अलावा कुछ नहीं रहा। फरवरी 05 के विस चुनाव में राजद ने मात्र सात अति पिछड़ाें को उम्मीदवार बनाया जबकि जदयू के अति पिछड़े उम्मीदवारों की संख्या 10 थी। नवम्बर के चुनाव में जदयू के अति पिछड़ा उम्मीदवारों की संख्या 12 हो गई। उस चुनाव में राजद ने इस वर्ग के आठ उम्मीदवार खड़े किए। जदयू ने सात अति पिछड़ाें को विधान परिषद में भेजा। लोकसभा चुनाव में राजद के 28 उम्मीदवारों में सिर्फ एक अतिपिछड़ा थे। जदयू के 25 उम्मीदवारों में चार अति पिछड़ा थे। पंचायतों में आरक्षण, आयोग और छात्रावास ये सब ऐसे काम हैं जिनसे अतिपिछड़ाें का कल्याण हुआ है। यह नीतीश सरकार की उपलब्धि है। इधर प्रवक्ता शंभूनाथ सिन्हा ने कहा कि किसान पंचायत में राजद नेताओं की भागीदारी से साबित हो रहा है कि राजद इस मुहिम को बल दे रहा है। उन्होंने कहा कि राजद शासनकाल में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर थे। आज अमन चैन से जी रहे हैं।

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