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बिजली के मामले में बिहार के साथ हुई नाइंसाफी अरुणाचल के

कार्यालय संवाददातापटनाबिजली के मामले में बिहार के साथ एक बार फिर नाइंसाफी हुई है। सूबे को अरुणाचल प्रदेश के शुभानश्री हाइडल प्रोजेक्ट से 600 मेगावाट बिजली मिलने की आस टूट गयी है। नेशनल हाइडल प्रोजेक्ट के शुभानश्री हाइडल प्रोजेक्ट से सूबे को तीस फीसदी बिजली मिलनी थी। इस बाबत नेशनल हाईडल प्रोजेक्ट कारपोरेशन(एनएचपीसी) के साथ बाकायदा बिहार राज्य बिजली बोर्ड का वर्ष 2000 में करार हुआ था। 2012 से शुभानश्री में 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसमें सूबे को भी 30 फीसदी यानी लगभग 600 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो जाती पर आवंटन नहीं होने से यह उम्मीद टूट गयी। बिहार राज्य विद्युत बोर्ड ने इस मसले पर दो बार अपना विरोध भी दर्ज कराया पर बात नहीं बन सकी। बोर्ड के प्रवक्ता हरेराम पांडेय के मुताबिक बिजली बोर्ड ने इस मसले पर ईस्टर्न रीजन पॉवर प्रोजेक्ट(ईआरपीसी) कोलकाता के समक्ष भी अपना विरोध दर्ज कराया है। उनके मुताबिक हाइडल प्रोजेक्ट की बिजली अपेक्षाकृत सस्ती होती है। जानकारी के मुताबिक एनएचपीसी के इस प्रोजेक्ट से अब एनईआर(नार्थ ईस्टर्न रीजन) को पचास फीसदी व एनडब्ल्यूआर(नार्थ वेस्टर्न रीजन) को पचास फीसदी बिजली दी जाएगी। बिहार को कोई आवंटन नहीं हुआ है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक एनईआर को बिजली दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है पर नार्थ वेस्टर्न रीजन को पचास फीसदी बिजली दी जाए व बिहार को नहीं, यह उचित नहीं है। जबकि बिहार राज्य बिजली बोर्ड को करार के बावजूद बिजली का आवंटन नहीं किया जाना नाइंसाफी है। मालूम हो कि बिहार में बिजली का अपना उत्पादन नहीं होने से सेंट्रल सेक्टर से मिलने वाली बिजली से ही पूरा सूबा रौशन होता है। कल-कारखाने भी इसी उधार की बिजली पर चलते हैं। अगर इस प्रोजेक्ट से 600 मेगावाट बिजली मिलती तो बहुत राहत मिल जाती। सूबे में बिजली की डिमांड 2500 मेगावाट तक पहुंच गयी है पर सेंट्रल सेक्टर से 1550 मेगावाट का ही आवंटन होता है।

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