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चैता के ‘ब्रांड ऐंबेसडर’ बन घूम रहे लालू

पटना(हि. ब्यू.)। लालू प्रसाद इन दिनों बिहार में चैता के ‘ब्रांड ऐंबेसडर’ बनकर घूम रहे हैं। गांव-जवार में जहां कहीं चैता हो रहा हो वहां कोई नेता दिखे न दिखे, लालू दिख ही जाएंगे। मुंह में गिलोरी दबाये कभी सिर पर गमचा बांधे तो कभी झाल लेकर ढोलक से ताल मिलाते। बीच-बीच में ‘पच’ से पीक फेंक सुर भी मिलाने लगते हैं.. हो रामा कंठे सुरवा! वे रोज ऐसे समारोहों में भाग ले रहे हैं। बस पता लगने भर की देर होती है कि फलां गांव में आज चैता है। पगड़ी बांधकर खास खांटी अंदाज में पहुंचे लालू रातभर बैठकर चैता के साथ ही अन्य बिहारी लोकगीतों का आनंद उठाते हैं। उनके फेवरेट स्टार हैं भरत शर्मा व्यास जिन्हें लालू बड़े ही जतन से सुनते हैं। वैसे दूसरे चैता व लोकगीत गायकों को भी दाद देने में वे पीछे नहीं हटते। बिहार की सत्ता में जब वे शीर्ष पर थे तब भी उनका यह प्रेम जगजाहिर था। लेकिन इस मामले में नेताओं के व्यवहार से वे दुखी रहते हैं। वे कहते हैं कि हम स्व. भिखारी ठाकुर की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन तब लोग कहते थे ‘लालू लौंडा का नाच करवाता है’।राजद प्रमुख पुराने फार्म में हैं। थोड़ा फर्क है, अब वे अगड़ा-पिछड़ा की बात नहीं करते। देशभर में देशज राजनेता की पहचान रखने वाले श्री प्रसाद का मामना है ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से प्रेम बढ़ता है। रातभर जागकर किसान मनोरंजन भी करते हैं और खलिहान में फसल की रखवाली भी होती है। हालांकि चैता के बहाने उनका चुनाव अभियान भी चल निकला है। कार्यक्रम चैता का ही क्यों नहीं हो, लालू पहुंचें और भाषणबाजी न हों। वे सीधे वोट नहीं मांगकर इंटेलिजेंटली लोगों को आकर्षित करते हैं। आखिर विधानसभा का चुनावी वर्ष भी तो है।

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