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17 नबम्बर, 2019|12:35|IST

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देश की खबरें-2

आतंकवादी कहने पर बुखारी पर होगी कार्रवाई वार्तालखनऊ इंट्रो- बुखारी ने आजमगढ़ में केन्द्र और राज्य सरकार को आंतकवादी कहा थाकेन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को आतंकवादी कहने पर दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी पर राज्य सरकार कार्रवाई करेगी। विधानसभा में गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने इमाम बुखारी का नाम लिए बिना कहा कि राज्य सरकार संविधान के नियमों और कानून का उल्लंघन करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। लालजी वर्मा संसदीय कार्य मंत्री कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी और भारतीय जनता पार्टी के हुकुम सिंह के नियम 300 के तहत उठाए सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि देश और राज्य में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने पिछले मंगलवार को आजमगढ़ की जनसभा में केन्द्र और राज्य सरकार को आतंकवादी कहा जो देशद्रोह से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार आतंकवाद को खत्म करने के लिए काम कर रही है। दोनों सरकार को आतंकवादी कहना देश के संविधान और जनादेश का अपमान है क्योंकि दोनों सरकारों को जनता ने चुना है।उन्होंने कहा कि इमाम बुखारी कट्टरवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देकर देश और राज्य में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। उन्होंनें शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को भी इसी श्रेणी में रखा। तिवारी ने कहा कि ऐसा बयान देकर केन्द्र और राज्य सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि अहमद बुखारी का यह बयान उत्तर प्रदेश में दिया गया है इसलिए राज्य सरकार को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।राजशेखर रेड्डी की पत्नी ने विधायक के रूप में शपथ ली वार्ताहैदराबाद आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की पत्नी वाई एस विजयलक्ष्मी ने गुरुवार को विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की। वह राज्य के पुलिवेंदुला विधानसभा क्षेत्र से निर्विरोध चुनी गई हैं। गत वर्ष दो सितंबर को हुई एक हेलीकाप्टर दुर्घटना में रेड्डी के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर विजयलक्ष्मी निर्वाचित हुई हैं। राज्य विधानसभा अध्यक्ष एन किरनकुमार रेड्डी ने 15 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र के महज चार दिन पहले विजयलक्ष्मी को शपथ दिलाई। इस अवसर पर कांग्रेस सांसद और उनके बेटे वाई एस जगनमोहन रेड्डी, राज्य में पार्टी के राजनीतिक सलाहकार व राज्यसभा सदस्य के वी पी रामचंद्र राव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास सहित पार्टी के कई नेता मौजूद थे।सेना प्रमुख ने किया पूर्व सेना सचिव के खिलाफ कार्रवाई का बचावइंट्रो- सेना ने प्रकाश के खिलाफ खुद पहल करते हुए कार्रवाई की है। इसके लिये किसी बाहरी एजेंसी की जरूरत नहीं पड़ी।भाषानई दिल्ली सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने सुकना जमीन घोटाले के मामले में पूर्व सेना सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को सही ठहराते हुए कहा है कि मामले के तथ्यों के विश्लेषण के बाद और रक्षा मंत्री ए़ क़े एंटनी की सलाह पर उन्होंने सबसे उपयुक्त कदम उठाया है।कपूर ने कहा कि मेरा मानना है कि वह तथ्यों के विश्लेषण और रक्षा मंत्री ए़ क़े एंटनी की सलाह पर उठाया गया सबसे सही कदम है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़ी कानूनी कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। मामले में सिर्फ सुनवाई पूरी की गई है जबकि बाकी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।उन्होंने कहा कि सुबूतों की समीक्षा होना बाकी है। कमांडिंग अफसर मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद कार्रवाई के बारे में फैसला करेंगे। लोगों को गलतफहमी है कि अगर किसी सैन्य अधिकारी का कोर्ट मार्शल होता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई जरूर होती है जबकि ऐसा नहीं है। पूर्व में अनेक अधिकारी कोर्ट मार्शल में बरी भी हो चुके हैं। प्रकाश के अपने खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में चुनौती देने के बारे में पूछने पर सेना प्रमुख ने ज्यादा कुछ न बोलते हुए कहा कि पंचाट दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किसी मामले पर फैसला कर सकता है।सुकना घोटाले के भंडाफोड़ से सेना की छवि खराब होने की बात स्वीकार करते हुए कपूर ने मीडिया पर सेना संबंधी कानून की बारीकियों को समङो बगैर मामले को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हां, इस मामले से सेना को कुछ हद तक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। सेना ने भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होने देने के लिये कदम उठाए हैं। मीडिया इस मामले को सनसनीखेज बना रहा है। अगर मीडिया को सेना के विधिक तंत्र की कार्यप्रणाली के बारे में बेहतर जानकारी होती तो वह इस मामले को सकारात्मक ढंग से लेने के लिये अपेक्षाकृत अच्छी तरह से तैयार होता।कपूर ने कहा कि सेना ने इस मामले पर अति-प्रतिक्रियावादी रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर रिपोर्टिंग पूरी तरह स्पष्ट जानकारी पर आधारित होती तो बेहतर होता। तथ्यों की पड़ताल किये बगैर कोई निर्णय सुना देना वाकई संबंधित व्यक्ति या लोगों के चरित्र हनन के समान है। सेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अवधेश प्रकाश के खिलाफ कार्रवाई का उनका फैसला सही और न्यायसंगत साबित होगा। उन्होंने कहा कि सेना ने प्रकाश के खिलाफ खुद पहल करते हुए कार्रवाई की है। इसके लिये किसी बाहरी एजेंसी की जरूरत नहीं पड़ी। कपूर ने कहा कि सेना एक लचीला, वस्तुनिष्ठ और जनता की नजर में अपनी छवि को लेकर सजग संगठन है। सेना ने खुद में सुधार के लिये खुद ही कार्रवाई की है। यह पूछने पर कि क्या उन्होंने इस प्रकरण के सिलसिले में की गई सभी कार्रवाइयों के लिये रक्षा मंत्री से सलाह मशविरा किया था, उन्होंने कहा कि वह एक प्रक्रिया है और उसी के तहत उनसे सम्पर्क हुआ।गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सुकना सैन्य छावनी से सटी 71 एकड़ जमीन से जुड़े में सेना ने एक निजी व्यवसायी को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया था। इस मामले की सेना द्वारा जांच में अवधेश प्रकाश, लेफ्टिनेंट जनरल पी़ क़े रथ, लेफ्टिनेंट जनरल रमेश हलगली और मेजर जनरल पी़ सी़ सेन को आरोपित किया गया था।अमरीकी फर्म ने किया भारत से विमान के डोर खरीदने का समझौता वार्तानई दिल्लीएक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमरीकी बोइंग कम्पनी बोइंग ने भारतीय नौसेना को मिलने वाले लम्बी दूरी के टोही विमानों के शस्त्रागार बेय डोर के निर्माण के लिए हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय नौसेना के लिए बोइंग से करीब दो अरब डालर की लागत से आठ पी 8 आई टोही विमान खरीदे जा रहे हैं और समझौते की शतरें के अनुसार सौदे की राशि का 33 प्रतिशत भारत में ही निवेश किया जाना है। भारत के लिए बोइंग के उपाध्यक्ष विवेक लाल ने गुरुवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 47 लाख डालर के इस सौदे के तहत एचएएल बोइंग को पहले डोर इस साल के अंत तक सिएटल में सौंप देगा। भारत का अमरीकी कम्पनी से यह सौदा जनवरी 2009 में हुआ था और समझौते की शतरें के अनुसार पहला पी 8 विमान 48 महीने के भीतर मिलना है। प्रो. गोपी चंद नारंग को साहित्य अकादमी की मानद फैलेशिपवार्ता नई दिल्ली साहित्य अकादमी की मानद फैलोशिप गुरुवार को यहां उर्दू के प्रख्यात आलोचक पद्मभूषण प्रो. गोपीचंद नारंग को प्रदान की गई। साहित्य आकदमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय ने 79 वर्षीय नारंग को एक समारोह में फैलोशिप प्रदान की। यह साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। सम्मान में एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और श्रीफल शामिल है। 11फरवरी 1931 को दुक्की बलुचिस्तान में जन्में नारंग साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रह चके हैं। गंगोपाध्याय ने नारंग के उल्लेखनीय योगदान के लिए यह फैलोशिप प्रदान करते हुए कहा कि प्रो. नारंग जैसे समालोचक मात्र नहीं है जो उर्दू और अंग्रेजी में समानरूप से व्यापाक तौर पर लिखते रहे हैं। बल्कि आप सम्पूर्ण भारतीय साहित्य की सौंदर्य शास्त्रीय संवदेना के उपयुक्त सुसंगत और सुपरिभाषित साहित्य शास्त्र के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के अतिथि नारंग के उर्दू, अंग्रेजी तथा हिन्दी में 64 पुस्तकें प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा मौलाना आजाद केन्द्रीय उर्दू विश्वविद्यालय से डीलिट उपाधि मिल चुकी है। उन्हें वर्ष 1995 में अकादमी पुरस्कार तथा 1985 में गालिब अवार्ड भी मिल चुका है। अमृता प्रीतम, कृष्णा सोबती, विद्यानिवास मिश्रा, नागार्जुन, रामविलास शर्मा, जैसे लोगों को यह फैलोशिप दी गई है।

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