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14 नबम्बर, 2019|7:48|IST

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..और माँ की भक्ति में रम गए अली

िहन्दुस्तान संवाद लखनऊलखीमपुर के मोहम्मद अली 20 साल पहले चौक िस्थत बड़ी काली जी मिंदर घूमने आए थे। वह यहीं नक्कारा बजाकर माँ को खुश करने की जुगत में लग गए। धीरे-धीरे िदन बीतते गए और काली माँ के प्रित उनकी आस्था बढ़ती गई। आस्था इतनी प्रगाढ़ हो गई कि अब वह किसी जाित धर्म को नहीं मानते हैं और मिंदर के सारे काम में िहस्सा बँटाते हैं। वह माँ की सेवा में लगे रहते हैं। यही कारण है कि कोई उन्हें बाबूलाल तो कोई नक्कारा मास्टर कहकर पुकारता है। वह खुद कहते हैं कि भिक्त जाित धर्म नहीं देखती। अब तो माँ के चरणों में ही वह अपना जीवन िबताना चाहते हैं। मिंदर के प्रबंधक केशव प्रसाद बाजपेयी ने बताया कि बाबू लाल मिंदर के अिभन्न अंग बन गए हैं। उनकेजिंम्मे मिंदर का बड़ा काम रहता है। िपछले 40 साल से मिंदर में सेवा करने वाले चौक के ही अिनल मेहरोत्रा कहते हैं कि इस मिंदर में एक-दो नहीं दर्जनों ऐसे मुसलमान भाई हैं जो माँ के भक्त हैं।

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