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10 दिसंबर, 2019|4:08|IST

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पापा, भैया के बिना मर जाऊंगी .. बुझ गया घर का

नीतीश कुमार सोनी पटना। दिन बुधवार। स्थान -कदमकुआं में पुरानी अरविन्द महिला कॉलेज रोड स्थित ‘अख्तियारपुर हाउस’। अंदर से बाहर तक लोगों की शोकाकुल भीड़। सभी घर के इकलौते चिराग विवेक शेखर के बुझने के गम में डूबे हुए। समय-शाम चार बजे। अचानक एक कार वहां आकर रूकती है। उससे बाहर निकलते ही पम्मी (मृतक की बहन) के चीत्कार से माहौल कारुणिक हो गया। दर्जनों आंखें नम। सामने शव को देख पिता से लिपटती पम्मी चीखती है ‘पापा.. ऐसा नहीं हो सकता। भैया के बिना मैं मर जाऊंगी। अब मैं किसे भैया कहूंगी। वह हमे छोड़ कर नहीं जाएगा..।’परिजनों को यकीन नहीं हो रहा कि विवेक के 25 वर्षो का साथ घंटे भर में टूट जायेगा। अचानक हंसती-खेलती गृहस्थी की खुशियों पर ग्रहण लग गया। तकदीर का सितम देखिये कि जो बेटा बुढ़ापे का सहारा बनता उसकी अर्थी को पिता अतुल शेखर को कंधा देना पड़ा। किसी ने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था पर होनी को कौन टाल सकता है। अतुल के तमाम सपने एक ही झटके में चकनाचूर हो गये। बेटे की मौत के गम में रोते-रोते बार-बार बेहोश हो रही विभा को संभाल रहे परिजन व पड़ाेसी भी फूट-फूट कर रो पड़ते। 1983 में हुई शादी के अगले ही वर्ष दंपति को विवेक के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। बीकॉम करने के बाद वह बैंक पीओ व अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। इकलौती बहन आकांक्षा उर्फ पम्मी की शादी जमशेदपुर निवासी डॉक्टर सीमांत मउआर के साथ चार वर्ष पहले हुई थी। बीते मंगलवार की रात अपने जिगरी दोस्त रंजीत के जन्म दिन की पार्टी घर पर मनाते हुए विवेक ने अपने माता-पिता, चाचा प्रवीण कुमार आदि को केक खिला मुंह मीठा कराया था। प्रवीण ने बताया कि रंजीत ने अपने कुत्ते के लिए पेडिग्री आदि खरीदी थी। केक व अन्य सामान होने के कारण उसे पहुंचाने के लिए विवेक उसके साथ बाइक से सवा दस बजे रात में निकला। हालांकि पड़ाेस के ही एक दुकानदार ने अपने घर लौटने के दौरान जब उसकी लाश मलाही पकड़ी में देखी तो सवा 11 बजे रात में उसने घर पर सूचना दी। ं

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