आरटीआई दाखिल करते ही कुणाल मोची को मिली मजदूरी - आरटीआई दाखिल करते ही कुणाल मोची को मिली मजदूरी DA Image
11 दिसंबर, 2019|2:07|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आरटीआई दाखिल करते ही कुणाल मोची को मिली मजदूरी

सूचना अधिकार के आवेदन का कमालसंजय कुमारपटना (हि.प्र.)। सूचना अधिकार अधिनियम ने सिर्फ नौकरशाहों पर ही शिकंजा नहीं कसा बल्कि किसानों पर भी भारी पड़ा। सूचना अधिकार अधिनियम का कमाल यही रहा कि कुणाल मोची को अपनी मेहनत की मजदूरी भी मिल गई। पुनपुन के सम्मनचक गांव निवासी कुणाल मोची पुनपुन जटडुमरी गांव निवासी किसान विजय यादव के यहां मजदूरी का काम करता था। कुणाल लगातार विजय यादव के खेत में मजदूरी करता रहा लेकिन मजदूरी नहीं मिल रही थी। जब कुणाल 62 दिनों तक खेत में लगातार काम करता रहा और मजदूरी नहीं मिली तो उसने खेत में काम करना बंद कर दिया और मजदूरी की मांग करने लगा। किसान ने कुणाल को मजदूरी तो नहीं ही दी, उल्टे मारपीट कर जान मारने की धमकी देने लगा और खेत से बाहर कर दिया। इसके बाद कुणाल मोची ने किसान के खिलाफ कमजोर वर्ग थाना में शिकायत दर्ज कराई। बाद में पुलिस महानिरीक्षक अनुसूचित जाति जनजाति कमजोर वर्ग शिकायत निवारण कोषांग पटना में भी शिकायत दर्ज कराई। दोनों पुलिस पदाधिकारियों के यहां शिकायत दर्ज कराने क बाद भी किसान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और कुणाल मोची को कोई राहत भी नहीं मिली। अंत में मोची ने बिहार सूचना अधिकार मंच का दरवाजा खटखटाया और उसके सहयोग से सूचना अधिकार आवेदन का उपयोग किया। सूचना अधिकार का आवेदन जाते ही पुलिस हरकत में आ गई और कमजोर वर्ग के पुलिस अधीक्षक ने इस केस में जांच का आदेश दे दिया। पुलिस जांच रिपोर्ट में किसान को दोषी ठहराया गया। पुलिस जांच रिपोर्ट के बाद किसान घबरा गया। उसने मजदूर कुणाल मोची के साथ पंचनामा के माध्यम से समझौता किया और बकाया मजदूरी का भुगतान कर दिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आरटीआई दाखिल करते ही कुणाल मोची को मिली मजदूरी