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ताकि बड़ा शहर भी लगे अपना-सा

छोटे शहर से दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में प्रवेश करते समय अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक दिक्कतें सामने आती हैं। क्या हैं ये दिक्कतें और इनसे कैसे निजात पाई जा सकती है, बता रही हैं वंदना अग्रवाल

कभी नौकरी की तलाश तो कभी नामी-गिरामी शिक्षण संस्थान में दाखिले के लिए बड़ी संख्या में लड़कियां छोटे शहरों से बड़े शहरों की ओर कूच करती हैं। मन में हसरत होती है जल्द ही इन शहरों में अपना मुकाम बनाने की। सपने पूरा करने के लिए सही दिशा में आगे भी बढ़ती हैं। पर ये बढ़ते कदम दिक्कतों का पुलिंदा लेकर खड़े हो जाते हैं। पहली दिक्कत बड़े शहरों की रफ्तार के साथ तालमेल बिठाने में आती है। बोलचाल का ढंग और  पहनने-ओढ़ने का अंदाज भी दिक्कतें बढ़ाता है। जैसे मीडिया की पढ़ाई कर रही गरिमा जब पटना से दिल्ली को चली थी तो उसके मन में एक अलग तरह की खुशी थी। उसे लगा कि वह कॉलेज टॉपर है, कॉलेज में अध्यापक-छात्र सबसे उसके अच्छे रिश्ते हैं। दिल्ली में भी वह रिश्ते बना लेगी। पर उसे धक्का तब लगा, जब दिल्ली की भीड़ में वह खोने लगी। पहचान तो दूर, अधिकांश छात्र उससे बात करना तक मुनासिब नहीं समझते थे। किसी से खुद जाकर बात भी करे तो लोग मुंह बिचका कर निकल जाते थे।

उसके जाने के बाद अक्सर छात्र बीटीएम (बहनजी टर्न मॉड) कहकर उसकी खिल्ली उड़ाते। कुछ दिनों तक यह बर्दाश्त करने के बाद उसने खुद को बदलना शुरू किया। सबसे पहले गरिमा ने हिंदी के क्षेत्रीय उच्चारण से निजात पाई। बातचीत में अपने क्षेत्रीय शब्दों की जगह उसने हिंदी-इंग्लिश के शब्दों का अधिक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। कपड़े भी वह अब एकदम स्मार्ट पहनती है। नफासत भरे अंदाज में लोगों से मिलती है। व्यवहार में भी उसने थोड़ा परिवर्तन किया। अब वह बिना वजह किसी को फोन नहीं करती, न ही बिना किसी पूर्व सूचना के किसी के घर जाती है। इन थोड़े से बदलावों ने गरिमा को परफेक्ट मैट्रो गर्ल बना दिया है।

अगर आप भी छोटे शहर से बड़े शहर जा रही हैं तो निम्न बातों का ध्यान रखें

जिस दिन से बड़े शहर में बसने का सपना देखें, उसी दिन से अपने बातचीत के अंदाज में परिवर्तन शुरू कर दें। स्थानीय उच्चारण, बोली की जगह ज्यादा से ज्यादा अंग्रेजी और बोलचाल की हिंदी बोलने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि अंग्रेजी तरक्की की भाषा है और अच्छी हिंदी दिलों में जगह बनाने का रास्ता।

हमेशा मौके की नजाकत के हिसाब से कपड़े पहनें। ऐसा न हो कि खुद को मॉडर्न साबित करने के लिए नाइट पार्टी में कैप्री और फ्लोटर्स पहन कर चली जाएं।

नए शहर में जमने के लिए संपर्कों की जरूरत पड़ती है। इसलिए शहर से चलते समय कुछ पहचान के लोगों के फोन नंबर और पते साथ लेकर चलें।

लोगों से मिले-जुलें जरूर, पर हर व्यक्ति पर एकदम विश्वास न करें। पहले कुछ मौकों पर परखें। हर किसी को मोबाइल नंबर न दें।

किसी से मिलने जाने से पहले फोन से बात करके मिलने का समय ले लें।

किसी अंजान व्यक्ति को अपने बारे में विस्तार से न बताएं।

आप कहां हैं, किसके साथ हैं यह जानकारी परिवार के सदस्यों को देती रहें।

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